दिन में ऐशगाह और रात में नशेड़ियों काअड्डा, करोड़ों के मेंटेनेंस पर भारी बदहाली

A pleasure ground by day and a haven for drug addicts by night, suffering from severe neglect despite millions spent on maintenance.

स्मार्ट सिटी की शर्मनाक सच्चाई : रानीताल बन गया अराजकता और गंदगी का अड्डा

दैनिक रेवांचल टाइम्‍स जबलपुर – स्मार्ट सिटी योजना के अंतर्गत जिस रानीताल तालाब को शहर की पहचान और नागरिकों के लिए स्वच्छ, सुंदर व सुरक्षित पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित किया जाना था, वही स्थान आज अराजकता, गंदगी और असामाजिक गतिविधियों का गढ़ बनता जा रहा है। सौंदर्यीकरण और रख-रखाव के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाने के बावजूद जमीनी सच्चाई न केवल शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोलती है, बल्कि स्मार्ट सिटी मिशन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े करती है।


दिन के समय रानीताल परिसर युवाओं की ऐशगाह में तब्दील नजर आता है। सार्वजनिक स्थल की मर्यादा को ताक पर रखकर यहां खुलेआम अश्लील हरकतें होती रहती हैं, जिससे परिवारों, बुजुर्गों और बच्चों के लिए यह स्थल असहज और असुरक्षित बन चुका है। नागरिकों का कहना है कि कई बार महिलाएं और बच्चियां असहज महसूस करती हैं, लेकिन न तो कोई सुरक्षाकर्मी मौजूद होता है और न ही पुलिस की नियमित गश्त दिखाई देती है।

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शाम ढलते ही तालाब का माहौल और भयावह हो जाता है। जैसे-जैसे अंधेरा बढ़ता है, वैसे-वैसे परिसर में नशेड़ियों की भीड़ जमा होने लगती है। शराब, गांजा और अन्य नशीले पदार्थों का खुलेआम सेवन किया जाता है। नशे की हालत में लोग हंगामा करते हैं, अपशब्द बोलते हैं और कई बार मारपीट तक की घटनाएं सामने आती हैं। स्थानीय रहवासी बताते हैं कि रात के बाद महिलाओं का यहां से गुजरना भी खतरे से खाली नहीं रहता।

तालाब या कूड़ा डंपिंग यार्ड?

तालाब की असल स्थिति और भी चिंताजनक है। पानी की सतह पर अब पानी कम और चोई, कचरा, पॉलीथिन, सड़े-गले कचरे के ढेर अधिक नजर आते हैं। किनारों पर जमी गंदगी, नालियों के जरिए बहकर आया गंदा पानी और प्लास्टिक की भरमार ने तालाब की सुंदरता पूरी तरह नष्ट कर दी है। पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि समय रहते सफाई और जलशुद्धिकरण का काम नहीं हुआ तो तालाब की जल संरचना पूरी तरह नष्ट हो सकती है।

टूटे बेंच और बिखरा कचरा

सैर-सपाटे के लिए बनाए गए बैठने के स्थान आज टूट-फूट का शिकार हैं। कई बेंच टूटे पड़े हैं, आसपास शराब की बोतलें, पत्तलों, पॉलीथिन और खाद्य पदार्थों के रैपर बिखरे पड़े दिखाई देते हैं। पाथवे किनारे झाड़ियों में गंदगी जमा है। साफ-सफाई का कोई नियमित सिस्टम नजर नहीं आता, जिससे यह क्षेत्र स्वच्छता की जगह बदबू का केंद्र बन गया है।

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करोड़ों खर्च, नतीजा शून्य

नगर निगम और स्मार्ट सिटी प्रबंधन समय-समय पर दावा करता रहा है कि रानीताल के सौंदर्यीकरण, सुरक्षा, लाइटिंग, साफ-सफाई, कैमरा सिस्टम और रख-रखाव पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। मगर नागरिकों के सवाल सीधे हैं।

अगर करोड़ों खर्च हुए तो तालाब आज गंदगी और नशे का अड्डा क्यों बना है?

न तो सीसीटीवी निगरानी प्रभावी है, न ही सुरक्षा गार्ड सक्रिय दिखाई देते हैं। कहीं-कहीं कैमरे तो लगे हैं, लेकिन वे या तो बंद हैं या केवल शो पीस बनकर रह गए हैं। यही वजह है कि असामाजिक तत्व बेखौफ होकर अपनी गतिविधियां अंजाम दे रहे हैं।

नागरिकों में नाराजगी

  • रानीताल क्षेत्र में रहने वाले रहवासियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि
  • बच्चों और महिलाओं की सुरक्षा खतरे में है,
  • शाम के बाद निकलना डरावना हो गया है,
  • तालाब से फैलती बदबू और गंदगी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो रही है।
  • लोग मांग कर रहे हैं कि 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था, स्थायी पुलिस चौकी, नियमित सफाई अभियान, जलशुद्धिकरण, और नशाखोरी पर सख्त कार्रवाई तुरंत की जाए।
  • प्रशासन से जवाब मांगता शहर
  • रानीताल सिर्फ एक तालाब नहीं, बल्कि ड़जबलपुर की धरोहर है। यदि इसकी वर्तमान स्थिति पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो यह स्थल जल्द ही पूरी तरह उजाड़ हो जाएगा। जनता पूछ रही है।

स्‍मार्ट सिटी के नाम पर केवल वीडियो और पोस्टर बनेंगे या ज़मीनी हकीकत भी बदलेगी?

फिलहाल रानीताल की बदहाली शासन-प्रशासन की उदासीनता का जीता-जागता उदाहरण बन चुकी है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी जनता की आवाज सुनते हैं या फिर यह ऐतिहासिक धरोहर ऐसे ही गंदगी, नशे और अव्यवस्था की भेंट चढ़ती रहेगी।

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