कर्ज में डूबते पीएम आवास योजना के हितग्राही

Budget 2023: 'PM Awas Yojana' allocation raised by 66% to provide houses to  poor | All you need to know | Budget News – India TV

जियो-टैगिंग में खुला भेदभाव, भुगतान में भारी देरी

रेवांचल टाईम्स – मंडला। ग्रामीण अंचलों में प्रधानमंत्री आवास योजना अपने उद्देश्य से भटकती नजर आ रही है। योजना का लाभ पाने वाले हितग्राही आज सिर पर छत नहीं, बल्कि कर्ज का बोझ ढोने को मजबूर हैं। सरकार द्वारा घर निर्माण के लिए दी जाने वाली राशि न तो पर्याप्त है और न ही समय पर मिल पा रही है। नतीजतन गरीब हितग्राही साहूकारों और निजी कर्ज के सहारे जैसे-तैसे मकान खड़ा कर रहे हैं।

हितग्राहियों का साफ कहना है कि मौजूदा लागत में मकान बनाना लगभग असंभव हो गया है। निर्माण सामग्री के बढ़ते दामों के बीच बेहद कम सहायता राशि मज़ाक बनकर रह गई है। ऊपर से जो राशि स्वीकृत होती भी है, वह महीनों तक खाते में नहीं पहुंचती। इस देरी ने हालात और बदतर कर दिए हैं।

सबसे गंभीर आरोप जियो-टैगिंग में खुलेआम भेदभाव को लेकर सामने आए हैं। ग्राम पंचायत स्तर पर मनमानी चल रही है। जिन हितग्राहियों का निर्माण कार्य अधूरा या शुरू ही नहीं हुआ, उनका जियो-टैग कर दिया जा रहा है, जबकि जिन्होंने समय पर काम पूरा कर लिया है, उनके जियो-टैग में जानबूझकर विलंब किया जा रहा है। इससे भुगतान अटक रहा है और ईमानदार हितग्राही सजा भुगत रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार यह गड़बड़ी जनपद पंचायत नैनपुर की अधिकांश ग्राम पंचायतों में सामने आई है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित प्रशासनिक उदासीनता और संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करती है।

जनता का सवाल है—

क्या प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों को छत देने के लिए है या उन्हें कर्ज में डुबाने के लिए?
जन अपेक्षा है कि प्रशासन इस गंभीर मामले को हल्के में न ले।
जियो-टैगिंग में हो रहे भेदभाव की तत्काल जांच हो लंबित भुगतान तुरंत जारी किए जाएं निर्माण लागत के अनुरूप सहायता राशि बढ़ाई जाए
वही दोषी पंचायतकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की जाए यदि समय रहते सुधार नहीं हुआ, तो यह योजना ग्रामीण गरीबों के लिए राहत नहीं, बल्कि अभिशाप बनकर रह जाएगी।

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