बिना अनुमति स्कूल प्रांगण का पेड़ काटा, शिक्षिका ने थाने में दर्ज कराई शिकायत

रेवांचल टाइम्स मंडला एक ओर जहां सरकार “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और पौधारोपण को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर असामाजिक तत्वों द्वारा हरित संपदा को नुकसान पहुंचाने के मामले भी सामने आ रहे हैं।

ताजा मामला महाराजपुर के ज्वाला जी वार्ड स्थित एक प्राथमिक शाला का है, जहां बिना अनुमति स्कूल प्रांगण में लगे लगभग दस वर्ष पुराने छायादार पेड़ को काट दिया गया। इस घटना से न केवल स्कूल प्रशासन बल्कि स्थानीय नागरिकों में भी रोष व्याप्त है।सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल परिसर में लगा यह पेड़ काफी बड़ा और घना था, जिसकी शाखाएं स्कूल की छत तक फैली हुई थीं।

आरोप है कि दीपक चक्रवाती एवं अमित चक्रवाती नामक व्यक्तियों ने बिना किसी पूर्व सूचना या अनुमति के पेड़ को काट दिया। जब इस कार्रवाई का विरोध किया गया तो संबंधित महिला शिक्षिका के साथ विवाद भी किया गया।घटना के संबंध में शिक्षिका ने महाराजपुर थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

शिक्षिका का कहना है कि पेड़ काटने के दौरान एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। उस समय स्कूल में लघुशंका की छुट्टी थी और बच्चे मैदान में खेल रहे थे। पेड़ की भारी शाखाएं अचानक नीचे गिरीं, जो बच्चों पर भी गिर सकती थीं। यदि ऐसा होता तो गंभीर दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता था।

पेड़ गिरने से स्कूल भवन को भी नुकसान पहुंचा है। स्कूल की छत पर रखी पानी की टंकी क्षतिग्रस्त हो गई है, जिससे आगामी गर्मी के मौसम में बच्चों के लिए पेयजल संकट उत्पन्न हो सकता है। इसके अलावा पास स्थित आंगनबाड़ी भवन की दीवारों में भी दरारें आ गई हैं। स्कूल प्रशासन का कहना है कि यह नुकसान सीधे तौर पर पेड़ काटने की लापरवाही का परिणाम है।

प्रधान अध्यापिका ने मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि विद्यालय परिसर में लगे पेड़ बच्चों को छाया देने के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बिना अनुमति इस प्रकार पेड़ काटना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा के साथ भी खिलवाड़ है। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस ने शिकायत दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का भी कहना है कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसी घटनाएं दोहराई जा सकती हैं।

पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता के इस दौर में स्कूल जैसे संस्थानों में लगे पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

फिलहाल पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ काटने के पीछे क्या कारण थे, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर हरित संपदा की सुरक्षा को लेकर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

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