✨ रमज़ान 2026 का आगाज़: इबादत, सब्र और रहमतों का मुबारक महीना शुरू

रेवांचल टाइम्स संवाददाता | पन्ना19 फ़रवरी 2026 को चांद के दीदार के साथ मुक़द्दस रमज़ान माह की शुरुआत हो गई। पहले रोज़े के साथ ही मस्जिदों में रौनक बढ़ गई है और इबादतों का सिलसिला तेज़ हो गया है।

इस्लामी हिजरी कैलेंडर के अनुसार रमज़ान का आगमन चांद दिखाई देने पर तय होता है। 29 या 30 रोज़ों के बाद शव्वाल का चांद नज़र आने पर ईद-उल-फ़ित्र मनाई जाती है।रमज़ान इस्लाम के पांच बुनियादी स्तंभों में से एक है। हर बालिग़ और सेहतमंद मुसलमान पर रोज़ा फ़र्ज़ है।

यह महीना सब्र, शुक्र, तक़वा और आत्म-सुधार का प्रतीक माना जाता है। रोज़ा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं, बल्कि झूठ, ग़ीबत, ग़ुस्सा और बुराइयों से खुद को बचाने का अभ्यास भी है।

यह इंसान को अपने नफ़्स पर काबू रखना और अल्लाह की याद में जीवन बिताना सिखाता है।

🌙 रमज़ान की फज़ीलत और शब-ए-क़द्रइस्लामी मान्यता के अनुसार रमज़ान रहमत, मग़फिरत और जहन्नम से निजात का महीना है। हदीसों में उल्लेख है कि इस महीने में जन्नत के दरवाज़े खोल दिए जाते हैं और जहन्नम के दरवाज़े बंद कर दिए जाते हैं।

इसी पवित्र माह में कुरआन मजीद नाज़िल हुआ। रमज़ान की 27वीं रात को शब-ए-क़द्र माना जाता है, जिसे “हज़ार महीनों से बेहतर” बताया गया है। इस रात मुसलमान पूरी रात नमाज़, तिलावत और दुआ में गुज़ारते हैं।

🕌 तरावीह की नमाज़ का विशेष महत्वरमज़ान की खास इबादतों में तरावीह की नमाज़ शामिल है, जो ईशा की नमाज़ के बाद अदा की जाती है। अधिकतर मस्जिदों में 20 रकअत तरावीह पढ़ी जाती है, जबकि कुछ स्थानों पर 8 रकअत भी अदा की जाती है। हाफ़िज़-ए-कुरआन तरावीह के दौरान पूरा कुरआन सुनाते हैं और 27वीं रात तक “ख़त्म-ए-कुरआन” पूरा किया जाता है।

हदीस के अनुसार जो शख्स ईमान और सवाब की नीयत से रमज़ान की रातों में क़ियाम करता है, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।

🤝 सामाजिक और स्वास्थ्य दृष्टि से अहमरमज़ान समाज में बराबरी और हमदर्दी का संदेश देता है। रोज़ा इंसान को भूख-प्यास का एहसास कराकर गरीबों के प्रति संवेदना बढ़ाता है। इसी महीने ज़कात और सदक़ा देने पर विशेष ज़ोर दिया जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार संतुलित आहार और सही दिनचर्या के साथ रखा गया रोज़ा पाचन तंत्र को आराम देता है और अनुशासन सिखाता है।रमज़ान का यह पाक महीना इबादत, त्याग, आत्मशुद्धि और भाईचारे का संदेश लेकर आया है।

मस्जिदों में नमाज़ियों की भीड़ बढ़ रही है, घरों में सेहरी और इफ्तार की तैयारियां चल रही हैं और चारों ओर आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है।

यह महीना मोहब्बत, इंसानियत और आपसी एकता को मजबूत करने का अवसर प्रदान करता है।

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