बीजेगॉव में डोलोमाइट खदान की ब्लास्टिंग से दहल रहा गांव, जर्जर स्कूल भवन में जान जोखिम में डाल पढ़ रहे बच्चे

रेवांचल टाइम्स मंडला/बम्हनी बंजर जिले के बम्हनी बंजर क्षेत्र अंतर्गत बीजेगॉव इन दिनों डोलोमाइट खदानों में हो रही भारी ब्लास्टिंग से दहशत के साये में जी रहा है। गांव के लोगों का आरोप है कि यहां संचालित डोलोमाइट खदान में रात के समय भी बड़े पैमाने पर विस्फोट किए जाते हैं, जिनके धमाकों से पूरा गांव कांप उठता है।

हालात इतने खराब हो चुके हैं कि गांव के मकानों से लेकर स्कूल भवन तक में दरारें पड़ गई हैं, और बच्चे जर्जर इमारत में जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार, बीजेगॉव में स्थित डोलोमाइट खदान में भारी मात्रा में ब्लास्टिंग की जाती है।

खासकर रात के समय होने वाले धमाकों से जमीन हिलने जैसी स्थिति बन जाती है। कई ग्रामीणों ने बताया कि विस्फोट के दौरान घरों के भीतर कंपन साफ महसूस होती है। “रात को ऐसा लगता है जैसे भूकंप आ गया हो।घरों में दरारें, लोगों में खौफब्लास्टिंग का असर गांव के कच्चे और पक्के दोनों तरह के मकानों पर पड़ा है।

कई घरों की दीवारों में चौड़ी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं। कुछ मकानों की छतें भी कमजोर हो गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यही स्थिति रही तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। महिलाओं और बच्चों में खासा डर का माहौल है।ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने इस संबंध में कई बार शिकायतें कीं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

उनका कहना है कि खदान संचालक रसूखदार है, इसलिए उनकी आवाज दबा दी जाती है।

“आखिर शिकायत करें तो कहां करें। कोई सुनने वाला नहीं हैजर्जर स्कूल में पढ़ने को मजबूर बच्चेसबसे चिंताजनक स्थिति गांव के शासकीय स्कूल की है। स्कूल भवन की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ चुकी हैं।

छत और रसोई कक्ष की हालत बेहद खराब बताई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, स्कूल की रसोई पूरी तरह जर्जर हो चुकी है और कभी भी ढह सकती है।स्कूली बच्चों ने बताया कि जहां वे मध्यान्ह भोजन करते हैं, वहां जाने में डर लगता है।

“दीवारों में दरारें हैं, छत से प्लास्टर गिरता है। कभी भी कुछ हो सकता है, लेकिन पढ़ने के लिए आना पड़ता है। अभिभावकों की चिंता भी बढ़ गई है, लेकिन गांव में अन्य विकल्प न होने के कारण बच्चे उसी भवन में पढ़ने को मजबूर हैं।खेतों में नुकसान, उड़ती धूल से बर्बाद फसलब्लास्टिंग का असर केवल भवनों तक सीमित नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि विस्फोट के दौरान भारी मात्रा में धूल उड़ती है, जिससे खेतों में खड़ी फसल को नुकसान पहुंचता है।

कई किसानों ने बताया कि ब्लास्टिंग के समय पत्थर भी दूर तक आकर गिरते हैं, खेतों की मेड़ टूट चुकी है।एक किसान ने बताया कि इस बार धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई।

“धान की बालियां ठीक से नहीं निकलीं, खेत में सादा ही सादा रह गया। उत्पादन बहुत कम हुआ है किसानों का आरोप है कि खदान की गतिविधियों ने उनकी आजीविका पर सीधा असर डाला है।

गांव में लगातार बढ़ रही समस्या के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार संबंधित विभागों में शिकायत की गई, लेकिन केवल आश्वासन मिला।

न तो ब्लास्टिंग की तीव्रता कम की गई और न ही क्षतिग्रस्त मकानों और स्कूल भवन का सर्वे कराया गया।

विशेषज्ञों का मानना है कि खदानों में ब्लास्टिंग के लिए निर्धारित मानकों और सुरक्षा नियमों का पालन अनिवार्य होता है। यदि आबादी के निकट विस्फोट किए जा रहे हैं, तो कंपन और उड़ने वाले मलबे से आसपास की संरचनाओं को नुकसान होना स्वाभाविक है।

ऐसे में नियमित निरीक्षण और प्रभाव का आकलन जरूरी है।कभी भी हो सकता है बड़ा हादसाबीजेगॉव की स्थिति चेतावनी दे रही है। एक ओर खदान से निकलने वाली धूल और कंपन से गांव की नींव हिल रही है, तो दूसरी ओर जर्जर स्कूल भवन में दर्जनों बच्चों का भविष्य और जीवन दोनों दांव पर हैं।

यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कोई भी बड़ी दुर्घटना प्रशासन और खदान संचालकों की लापरवाही की गवाही बन सकती है।ग्रामीणों ने मांग की है कि खदान में हो रही ब्लास्टिंग की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, कंपन का वैज्ञानिक परीक्षण हो, और प्रभावित मकानों व स्कूल भवन की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए।

साथ ही किसानों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए।फिलहाल बीजेगॉव के लोग दहशत और अनिश्चितता के बीच जी रहे हैं। सवाल यही है कि क्या जिम्मेदार विभाग समय रहते जागेगा, या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा।

हमारे स्कूल की छत और दीवारों में ब्लास्टिंग के कारण दरार आ गई है जहां हम खाना खाते है वहाँ जाने से डर लगता है कभी भी कुछ भी हो सकता है।

लक्ष्मी तेकाम स्कूली छात्रा

बहुत डर लगता है हमारी मजबूरी है हमारे सर हमे जहां पढ़ाएंगे हम वहां पढ़ेगें

तान्या तेकाम स्कूली छात्रा

बहुत डस्ट उड़ती है ब्लास्टिंग होती है तो पत्थर भी उड़कर आते है खेत मे आखिर किसको शिकायत करे डस्ट से फसल खराब हो चुकी है कु छ लाभ नही हुआ खेत से सादा ही सादा दिखाई दे रहा है खेत मे ब्लास्टिंग से खेत की मेड़ भी टूट चुकी है।

दमोती बाई शिवराम स्थानीय ग्रामीण

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