रेवांचल टाइम्स मंडला मध्य प्रदेश सरकार का वित्तीय वर्ष 2026-27 का बजट जनता, युवाओं, मजदूरों किसानों, शिक्षित बेरोजगारों,अस्थाई कर्मियों, महिलाओं और विद्यार्थियों से विश्वासघाती बजट से कम नहीं है। वित्त मंत्री ने जो बजट पेश किया है, वह सिर्फ जलेबी जैसा गोल-गोल ही है।
जिसमें जमीनी स्तर पर जनहित के मुद्दों पर काम करने के लिए जिक्र पूरी तरह गायब है।*वायदों का उल्लंघन*नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने मध्यप्रदेश की जनता से जो प्रमुख वादे किए थे, वह सारे वादे इस पंचवर्षीय के ढाई साल बाद भी वित्त मंत्री के बजट भाषण से गायब दिखाई दिए।
किसानों को धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 3100 रुपया प्रति क्विंटल,गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2700 रुपया प्रति क्विंटल, लाड़ली बहना योजना में महिलाओं को प्रति महीने 3 हजार रुपया और घरेलू गैस सिलेंडर 450 रुपये में देने के वादे बजट में कहीं पर भी नहीं हैं।
2026 में धान की खरीदी भी निर्धारित समय के पहले भी बंद कर देने से जिले के लगभग चार हजार किसान अभी भी अपनी धान की बिक्री सरकारी दर पर नहीं कर सके हैं।मजबूरन बाजार में औने-पौने दाम मे बेचने मजबूर हैं।
ऐसा इस तरह की कटौती ही कटौती वाले बजट के कारण होता है।इस पर भी कुछ अच्छा समझ में बजट में नहीं आ रहा है।जनविरोधी बजटबजट ने यह स्पष्ट कर दिया है,कि यह सरकार आम जनता के लिए कम और पूंजीपति वर्ग के लिए ज्यादा काम करती है, जो जनता से विश्वासघात करने वाली है और वादा-खिलाफी इसके स्वभाव में है।
मध्य प्रदेश की जनता खासकर मजदूर किसान वर्ग व वर्षों से अस्थाई रूप में सरकारी कार्यालयों में न के बराबर मानदेय पाकर भी पूरे समय काम करते आ रहे अस्थाई कर्मियों, आउटसोर्स कर्मियों के लिए बजट में कहीं भी स्थान नहीं दिया गया है।
शिक्षित बेरोजगारों की संख्या के अनुपात में रोजगार के पर्याय अवसर भी बजट से नदारद हैं। जिले में पर्याप्त मानव दिवस श्रम या काम नहीं दिया जा सकता है। जिसके कारण प्रदेश और प्रदेश से बाहर अन्य राज्यों में मजदूर मजदूरी पाने पूरा साल पलायन करने मजबूर रहते हैं।उनका पलायन रोकने की बात बजट में नहीं है।
जिले में स्कूल भवनों की हालत जिले भर में खराब से खराब चल रही है। दर्जनों स्कूल असुरक्षित और अव्यवस्थित वातावरण वाले भवनों , किसी के निजी मकानों,रंगमंचों और तो और झोपड़ियों में भी लगाए जा रहे हैं। जिनके भवन निर्माण को लेकर भी बजट पर्याप्त नहीं है।
भवन होने के बाद भी उनमें पर्याप्त और शुद्ध पानी ,बिजली और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भारी कमियां दिनों दिन बढ़ती ही जा रही हैं,जिससे शिक्षा की और खासकर ग्रामीणों की शिक्षा गर्त पर जाते दिखाई दे रही है। स्वास्थ्य लाभ देने की ओर भी यह बजट उन्मुख नहीं है।
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं में भारी कमियां हैं,भवन तो करोड़ों खर्च करके बनकर तैयार हैं, जिनमें अधिकांश समय ताले ही लगे रहते हैं।न उनमें डाक्टर हैं न ही पर्याप्त स्टाफ और सुविधाएं।
अपवाद स्वरूप कुछ को छोड़कर पीने का कहें या सिंचाई का , पानी के लिए पूरा जिला त्राहि-त्राहि होता जा रहा है,सभी बसाहटों तक पर्याप्त पानी पहुंचाने की जिक्र भी बजट में नहीं है।
वर्षों से बंद पड़े बड़ी-बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को चालू करने की बात भी नहीं की गई है। कुल मिलाकर जमीनी वर्गों को इस बजट से भारी निराशा ही हाथ लगी है।पी.डी.खैरवारसमाज शुभचिंतक मण्डला
