दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला।
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में पेयजल संकट दिन-ब-दिन गहराता जा रहा है। हालात यह हैं कि जिले के शहरों से लेकर गांवों तक लोग पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि मानो गहरी नींद में सोए हुए हैं।
जिले के कई क्षेत्रों में पीने के पानी की भारी किल्लत के कारण लोग परेशान हैं। कहीं हैंडपंप सूख चुके हैं तो कहीं पाइपलाइन होने के बावजूद पानी की एक बूंद तक नसीब नहीं हो रही। कई ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को दूर-दूर से पानी ढोकर लाना पड़ रहा है, जिससे लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
सरकार की महत्वाकांक्षी जल जीवन मिशन योजना, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल से जल पहुंचाना है, मंडला जिले में सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि इस योजना के तहत कराए जा रहे अधिकांश कार्य भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ गए हैं। कहीं पाइपलाइन अधूरी पड़ी है, कहीं पाइपलाइन बिछाने के बाद घरों में कनेक्शन ही नहीं किए गए।
इतना ही नहीं, जहां कनेक्शन दिए भी गए हैं वहां भी भारी अनियमितताएं सामने आ रही हैं। कई जगहों पर घरों के सामने नल लगाने के लिए कोई पक्का फाउंडेशन तक नहीं बनाया गया और सीधे पाइप डालकर औपचारिकता पूरी कर दी गई। इससे साफ जाहिर होता है कि काम केवल कागजों में पूरा दिखाने की कोशिश की जा रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद धरातल पर न तो पानी पहुंच रहा है और न ही योजना का लाभ मिल पा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर जल जीवन मिशन के नाम पर खर्च हो रही भारी-भरकम राशि का हिसाब कौन देगा?
जिले में पानी की समस्या को लेकर जगह-जगह विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस और परिणामकारी कदम उठते नजर नहीं आ रहे।
अब जिले के नागरिकों की मांग है कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत हुए सभी कार्यों की ग्राम पंचायत स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
साथ ही पूरे जिले में पेयजल समस्या का तत्काल समाधान किया जाए, क्योंकि गर्मी का मौसम शुरू होते ही यह संकट और भयावह रूप ले सकता है।
अगर समय रहते प्रशासन नहीं जागा, तो आने वाले दिनों में मंडला जिले में पानी को लेकर जनाक्रोश और भी तेज हो सकता है।
