सालों से एक ही जगह जमे पटवारी, तबादला नीति पर उठे बड़े सवाल

Revanchal
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राजस्व व्यवस्था पर मंडराए संदेह, बिचौलियों की बढ़ती सक्रियता से ग्रामीण परेशान

दैनिक रेवांचल टाइम्स – सिवनी।
जिले के राजस्व विभाग में वर्षों से एक ही स्थान पर जमे पटवारियों को लेकर अब गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शासन की स्पष्ट स्थानांतरण नीति होने के बावजूद कई पटवारी 8 से 10 वर्षों से एक ही तहसील और हल्के में पदस्थ हैं। ऐसे में प्रशासनिक निष्पक्षता, पारदर्शिता और राजस्व कार्यों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगने लगे हैं।


स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय तक एक ही स्थान पर जमे रहने से व्यवस्था पर प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है। आरोप है कि राजस्व से जुड़े कार्य जैसे नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और विभिन्न प्रमाण पत्र बनाने में अनावश्यक देरी की जा रही है। ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए कई-कई बार राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन फिर भी समय पर काम नहीं हो पाते।


बिचौलियों की बढ़ती सक्रियता की चर्चा
ग्रामीणों के बीच यह भी चर्चा है कि लंबे समय से एक ही जगह जमे रहने के कारण राजस्व कार्यों में बिचौलियों का दखल बढ़ गया है। कई लोगों का कहना है कि यदि सीधे आवेदन किया जाए तो काम लंबित रहता है, जबकि बिचौलियों के माध्यम से काम अपेक्षाकृत जल्दी होने की बात कही जाती है।


हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन लगातार उठ रही शिकायतें राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल जरूर खड़े कर रही हैं।


स्थानांतरण नीति की अनदेखी क्यों?
प्रदेश सरकार समय-समय पर स्थानांतरण नीति लागू करती है, जिसके तहत लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ कर्मचारियों का तबादला किया जाना आवश्यक माना जाता है। लेकिन सिवनी जिले में यह नीति कागजों तक ही सीमित नजर आ रही है।


सूत्रों के अनुसार कुछ पटवारी ऐसे भी हैं जो करीब एक दशक से एक ही हल्के में कार्यरत हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर किसके संरक्षण में यह स्थिति बनी हुई है।


प्रशासन की चुप्पी से बढ़े संदेह
जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते इन मामलों पर ध्यान नहीं दिया गया तो राजस्व व्यवस्था की निष्पक्षता पर गहरा असर पड़ सकता है।


लोगों का कहना है कि प्रशासन को चाहिए कि लंबे समय से जमे पटवारियों का तत्काल स्थानांतरण कर पारदर्शी व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि आम जनता को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिल सके।


अब देखना यह होगा कि लगातार उठ रहे इन सवालों के बीच जिला प्रशासन और राजस्व विभाग कब जागता है और क्या कार्रवाई करता है।

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