पेड़ों की लकड़ी को कहा ‘ना’, 15 चौराहों पर जली गोबर से बनी लकड़ी की होली
रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
जितेन्द्र अलबेला
सौसर -आज के आधुनिक दौर में जहाँ पर्यावरण प्रदूषण एक गंभीर चुनौती बना हुआ है, वहीं सौसर नगर ने सनातन परंपरा और प्रकृति संरक्षण के अद्भुत संगम की एक मिसाल पेश की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रेरणा और पांढुर्ना कलेक्टर नीरज कुमार वशिष्ठ के निर्देशानुसार, नगर के वार्ड नंबर 10/11 (कडू कॉलोनी) सहित 15 प्रमुख स्थानों पर इस वर्ष ‘गौकाष्ठ’ (गोबर से बनी लकड़ी) से होलिका दहन किया गया।
2021 से जारी है यह संकल्प
मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद और नवांकुर संस्था ‘यूथ ऑफ सौसर एसोसिएशन’ के मार्गदर्शन में वार्डवासियों ने हरियाली बचाने का यह संकल्प लिया है। उल्लेखनीय है कि यह सिलसिला वर्ष 2021 से निरंतर जारी है। इस पहल के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया जा रहा है कि उत्सवों को मनाते समय हम प्रकृति के प्रति अपने कर्तव्यों को न भूलें।
प्रदूषण में 40% तक की कमी और आध्यात्मिक लाभ
संस्था के सदस्यों ने बताया कि होलिका दहन में पेड़ों की लकड़ी जलाने से न केवल हरियाली का नुकसान होता है, बल्कि वायु प्रदूषण भी फैलता है। इसके विपरीत
कम प्रदूषण गौकाष्ठ के उपयोग से सामान्य लकड़ी की तुलना में 40% कम प्रदूषण होता है।
वैज्ञानिक महत्व जलने पर इससे निकलने वाला धुआं वातावरण को शुद्ध करता है।
आध्यात्मिक पक्ष गाय का गोबर पंचगव्य में शामिल होने के कारण इसका धार्मिक महत्व भी अत्यधिक है।
नगरव्यापी हुआ अभियान
जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक अखिलेश जैन और विकासखंड समन्वयक अनिल बोबडे के प्रयासों से इस वर्ष यह मुहिम पूरे नगर में फैल गई है। इस बार केवल एक वार्ड तक सीमित न रहकर, सौसर के 15 विभिन्न चौराहों पर गौकाष्ठ से होली जलाई गई, जो नगर की बदलती सोच का प्रतीक है।
मातृशक्ति और युवाओं का विशेष योगदान
होलिका दहन के अवसर पर नानाजी चौधरी, विवेक वाडेकर, रमेश ठाकरे सहित कई वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने में ‘यूथ ऑफ सौसर’ के योगेश सोमकुंवर, गोपाल कोठे, दिनेश पाटील और हेमंत हिवरकर ने सक्रिय भूमिका निभाई। वहीं, वार्ड की महिलाओं और स्व-सहायता समूहों ने पूजन कर भविष्य में भी गो-संरक्षण और पर्यावरण हितैषी कार्यों में सहयोग का संकल्प लिया।
