खुशियों की दास्तां ​विदेशी मेहमानों को भा रहे छिंदवाड़ा के होमस्टे, स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम के पर्यटकों ने लिया ग्रामीण जीवन का आंनद

Chhindwara's homestays are appealing to foreign guests, with tourists from Sweden and the United Kingdom enjoying rural life.

​जितेन्द्र अलबेला
रेवांचल टाइम्स छिन्दवाड़ा

​सतपुड़ा की वादियों में जब पहाड़ों की हवा में महकती मिट्टी की सुगंध घुलती है और ढोल-मांदर की ताल पर गांव जाग उठता है, तब सावरवानी जैसे छोटे से गांव में खुशियों की दास्तान लिखी जाती है। यही दास्तान अब विदेशी मेहमान भी अपने दिल में संजोकर ले जा रहे हैं। छिंदवाड़ा जिले का पर्यटन ग्राम सावरवानी इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय पटल पर अपनी छाप छोड़ रहा है।

​चार दिनों का यादगार प्रवास:

स्वीडन और यूनाइटेड किंगडम से आए पर्यटकों ने पिछले चार दिन सावरवानी में ऐसे गुजारे, मानो बचपन की सादगी फिर से लौट आई हो। उन्होंने झिरपा के हाट में ग्रामीणों के संग हंसी-ठिठोली की, साड़ी और स्कार्फ खरीदे, सिंघाड़े और देसी मिठाई का स्वाद चखा।

​बैलगाड़ी की सवारी और देसी पकवान:

शहरी चकाचौंध से दूर, विदेशी सैलानियों ने बैलगाड़ी की सवारी करते हुए गांव की गलियों में घूमने का अनूठा अनुभव लिया। होमस्टे में मक्के की रोटी, बैंगन का भरता और खीर का स्वाद उनके लिए किसी पांच सितारा भोजन से कम नहीं था, जिसने उन्हें भारतीय ग्रामीण खान-पान का दीवाना बना दिया।

Chhindwara's homestays are appealing to foreign guests, with tourists from Sweden and the United Kingdom enjoying rural life.
Chhindwara’s homestays are appealing to foreign guests, with tourists from Sweden and the United Kingdom enjoying rural life.


​”भावनाओं का ठिकाना” हैं होमस्टे:

सावरवानी के होमस्टे सिर्फ रहने की जगह नहीं, बल्कि भावनाओं का ठिकाना बन गए हैं। गांव की औरतों की मुस्कान, बच्चों की मासूम हंसी और मिट्टी के घरों की सुगंध ने उन्हें अपना बना लिया। मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और विलेज वे के सहयोग से यहां के होमस्टे अब सांस्कृतिक धरोहर बन चुके हैं, जहां ‘अतिथि देवो भवः’ की परंपरा जीवंत है।
​मिट्टी की खुशबू, पगडंडी की चाल,
सावरवानी में सजी है अपनेपन की मिसाल।
परदेसियों ने यहां पाया अपना जहां,
देसी दिलों ने लिख दी खुशियों की दास्तां।

​कलेक्टर के मार्गदर्शन में विकास

कलेक्टर हरेंद्र नारायन और सीईओ जिला पंचायत अग्रिम कुमार के मार्गदर्शन में सावरवानी को मॉडल गांव के रूप में विकसित किया गया है। स्वच्छता, बिजली, पानी और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों ने इसे न केवल पर्यटकों के लिए आकर्षक बनाया है, बल्कि यह गांव अब आत्मनिर्भरता की ओर भी बढ़ रहा है।
​सावरवानी में बीते इन चार दिनों ने विदेशी मेहमानों को सिर्फ प्रकृति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा से मिलवाया— और इस मिलन ने एक नई “खुशियों की दास्तां” लिख दी।

Share This Article
Translate »