राजपाल यादव के ₹9 करोड़ के चेक बाउंस/ऋण मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई, जमानत खरिज

Rajpal Yadav Check Bounce Case Delhi High Court Surrender Jail - चेक बाउंस  केस में राजपाल यादव को बड़ा झटका! दिल्ली हाई कोर्ट ने सरेंडर की मोहलत  बढ़ाने से किया इनकार| Navbharat

यह मामला न केवल एक अभिनेता से जुड़ा कानूनी विवाद है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आर्थिक लेन-देन में कानूनी जिम्मेदारियों की अनदेखी भारी पड़ सकती है

दिल्ली हाई कोर्ट में बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव के बहुचर्चित ₹9 करोड़ के चेक बाउंस और ऋण विवाद से जुड़े मामले में आज उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई जारी रही। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अभिनेता से जुड़े सभी तथ्यों और पूर्व आदेशों के अनुपालन पर विस्तार से चर्चा की।

राजपाल यादव को अभी तक जमानत नहीं मिली है — दिल्ली हाई कोर्ट ने बेल नहीं दी और उन्हें आगे भी कम से कम 4 दिन जेल में ही रहना होगा। कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया है क्योंकि उन्होंने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया।

क्या है पूरा मामला

राजपाल यादव पर एक निजी फाइनेंसर से ₹9 करोड़ का ऋण लेने और उसके बदले दिए गए चेक के बाउंस होने का आरोप है। यह मामला नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट के तहत दर्ज किया गया था। इससे पहले निचली अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद अभिनेता ने हाई कोर्ट का रुख किया था।

कोर्ट में क्या हुआ आज

सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अदालत को सहानुभूति हो सकती है, लेकिन कानून से ऊपर कोई नहीं है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अभिनेता को पहले भी भुगतान और समझौते के लिए कई मौके दिए गए थे, लेकिन आदेशों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ। इसी आधार पर अदालत ने जमानत याचिका पर कड़ा रुख अपनाया।

राजपाल यादव की ओर से पेश वकील ने दलील दी कि अभिनेता भुगतान को लेकर गंभीर हैं और जल्द समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि जमानत मिलने से वे मामले को सुलझाने में सक्षम होंगे।

बॉलीवुड में हलचल

इस मामले के सामने आने के बाद फिल्म इंडस्ट्री में भी हलचल है। कई कलाकारों और प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर राजपाल यादव के समर्थन में बयान दिए हैं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान होना चाहिए।

आगे क्या

राजपाल यादव को अभी तक जमानत नहीं मिली है — दिल्ली हाई कोर्ट ने बेल नहीं दी और उन्हें आगे भी कम से कम 4 दिन जेल में ही रहना होगा। कोर्ट ने यह निर्णय सुनाया है क्योंकि उन्होंने कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं किया।

Share This Article
Translate »