सरपंच-सचिव के अपने नियम-कानूननिर्माण कार्य में नहीं पड़ती उपयंत्री की जरूरत? सीसी सड़क में तकनीकी मानकों की धज्जियां, सरकारी राशि का खुला बंदरबांट

रेवांचल टाइम्स – मंडला
आदिवासी बाहुल्य जिला मंडला में भ्रष्टाचार और गुणवत्ताविहीन निर्माण अब अपवाद नहीं, बल्कि नियम बन चुका है। पंचायत स्तर पर शासन से आई राशि को विकास में लगाने के बजाय बंदरबांट का माध्यम बनाया जा रहा है। ताजा मामला तहसील मुख्यालय घुघरी की ग्राम पंचायत इमलीटोला से सामने आया है, जहां सीसी सड़क निर्माण में तकनीकी नियमों को खुलेआम ठेंगा दिखाया जा रहा है।

सीसी सड़क या मनमानी निर्माण?
ग्राम पंचायत इमलीटोला में बन रही सीसी सड़क का जब रेवांचल टाइम्स की टीम ने निरीक्षण किया, तो हैरान करने वाली सच्चाई सामने आई। नियमों के अनुसार—
सबसे पहले मुर्रम से लेवलिंग उसके बाद मजबूत बेस फिर तय मानक के अनुसार सीसी कंक्रीट लेकिन यहां न मुर्रम से लेवलिंग हुई, न बेस तैयार किया गया।
सीधे 40 एमएम गिट्टी बिछाकर उसके ऊपर सीसी सड़क डाल दी गई।
यह निर्माण नहीं, बल्कि भविष्य में सड़क उखड़ने की गारंटी है।

“हमें तकनीक मत बताइए” सरपंच का जवाब
जब रेवांचल टीम ने इस गंभीर तकनीकी गड़बड़ी पर सरपंच से सवाल किया, तो जवाब और भी चौंकाने वाला था।
सरपंच का कहना था—
“सड़क ऐसी ही बनती है, हमने कितनी ही सड़क बना डाली हैं।”
जब तकनीकी नियमों की बात की गई, तो दो टूक जवाब मिला—
“हम ऐसे ही बनाते हैं, आप हमें तकनीकी नियम मत बताइए।
हमें अपने हिसाब से बनाने दीजिए।”


यह बयान साफ दर्शाता है कि पंचायत में न कानून की परवाह है, न तकनीकी मानकों की, बल्कि सरपंच-सचिव अपनी समानांतर व्यवस्था चला रहे हैं।
उपयंत्री की जरूरत ही नहीं?
सबसे गंभीर सवाल यह है कि निर्माण कार्य में तकनीकी निगरानी करने वाला उपयंत्री आखिर कहां है?
क्या पंचायतों में अब बिना तकनीकी स्वीकृति और निगरानी के ही करोड़ों के काम होंगे?
यह स्थिति बताती है कि या तो—
उपयंत्री को जानबूझकर दरकिनार किया जा रहा है, या फिर पंचायत को खुली छूट दी गई है, दोनों ही हालात में सरकारी राशि की लूट तय है।
सचिव की अनभिज्ञता भी सवालों के घेरे में
वही जब पंचायत सचिव से इस विषय में बात की गई, तो उन्होंने पूरी तरह पल्ला झाड़ लिया।
“मुझे जानकारी नहीं है कि सड़क कैसी बन रही है, आप सरपंच से बात करें।”
— तुलीराम धुर्वे, सचिव, ग्राम पंचायत इमलीटोला
सवाल यह है कि


जब सचिव को ही निर्माण की जानकारी नहीं, तो भुगतान कैसे होगा?
और जवाबदेही किसकी होगी?
सरपंच पति का दबंग बयान
मामले में सरपंच पति का बयान और भी चिंताजनक है—
“सड़क ऐसे ही बनती है, आप हमें मत बताइए तकनीक।
हमने कई सड़क और पुलिया बना दी हैं, कहीं कुछ गलत नहीं है।”


— रोहित मरकाम, सरपंच पति, इमलीटोला
यह बयान साफ संकेत देता है कि पंचायत में तकनीकी विभाग की भूमिका को शून्य समझ लिया गया है।
उपयंत्री ने काम रुकवाया, लेकिन सवाल बरकरार
मामला सामने आने के बाद उपयंत्री ने कार्रवाई की बात कही—
“जैसे ही मुझे जानकारी मिली, आपके माध्यम से तत्काल काम बंद करवा दिया गया है।”
विजय झारिया, उपयंत्री, जनपद पंचायत घुघरी लेकिन बड़ा सवाल यह है।
अगर मीडिया मौके पर न पहुंचती,
तो क्या यह घटिया सड़क बनकर तैयार हो जाती?


क्या भुगतान भी हो जाता?
जिले में चल रहा है समानांतर ‘निर्माण तंत्र’
इमलीटोला का मामला यह साबित करता है कि मंडला जिले में कई पंचायतों में सरपंच-सचिव अपने ही नियम-कानून चला रहे हैं। तकनीकी विभाग की अनदेखी,
गुणवत्ताविहीन निर्माण, और बाद में औपचारिक जांच—
यही मॉडल बन चुका है। अब सवाल प्रशासन से क्या इस निर्माण की तकनीकी जांच होगी?


क्या जिम्मेदार सरपंच-सचिव पर कार्रवाई होगी?
क्या पहले बने ऐसे कार्यों की भी जांच होगी?
अगर इस मामले में भी सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो यह तय है कि पंचायतों में भ्रष्टाचार और मनमानी को खुला संरक्षण मिला हुआ है।
वही यह सड़क नहीं, सिस्टम की दरार है, और अगर अभी नहीं रोकी गई, तो नुकसान जनता का ही होगा।

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