खनिज विभाग की मिलीभगत से अवैध खनन का खेल?रेत–डोलोमाइट की लूट से पर्यावरण पर खतरा, कानून बेअसर

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाईम्स | मंडला।
मंडला जिला में अवैध खनन का मुद्दा अब गंभीर रूप ले चुका है। रेत, मुरूम और डोलोमाइट का बेलगाम उत्खनन न केवल शासन को करोड़ों के राजस्व से वंचित कर रहा है, बल्कि पर्यावरण और वन्यजीवों के अस्तित्व पर भी खतरा बनता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि खनिज विभाग की कार्यप्रणाली खुद सवालों के घेरे में है और अधिकारियों की कथित मिलीभगत की चर्चाएं आम हो गई हैं।


कान्हा क्षेत्र पर खनन का दबाव
कान्हा टाइगर रिजर्व के आसपास डोलोमाइट खनन से वन्यजीव कॉरिडोर प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।


विशेषज्ञों के अनुसार—
जंगलों की कटाई बढ़ रही है
प्राकृतिक जल स्रोत प्रभावित हो रहे हैं
जैव विविधता पर खतरा मंडरा रहा है


बताया जाता है कि 2000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र खनन से प्रभावित हो चुका है।


नर्मदा सहित नदियों का सीना छलनी
नर्मदा नदी और अन्य नदी-नालों से रातों-रात रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है।


ग्रामीणों का आरोप है—
“रेत से भरे ट्रक निकलते हैं, लेकिन जांच टीम कभी नहीं पहुंचती।”
इससे जलस्तर गिर रहा है
तटों का क्षरण बढ़ रहा है


भविष्य में जल संकट की आशंका गहरा रही है।
कानून सख्त, कार्रवाई कमजोर
माइंस एंड मिनरल्स एक्ट 1957 में अवैध खनन पर कड़ी सजा का प्रावधान है, इसके बावजूद लाइसेंस की आड़ में अनियमित उत्खनन जारी है।
ग्राम सभाओं द्वारा दर्ज आपत्तियों पर भी कार्रवाई नहीं होना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है।


पुराना सर्वे ठंडे बस्ते में
वर्ष 2013 में तत्कालीन कलेक्टर स्वाति मीना द्वारा डोलोमाइट माइंस का सर्वे कराने के आदेश दिए गए थे, लेकिन उसके बाद ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा अवैध खनन का मामला
देश में अवैध रेत खनन पर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है और राज्यों से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा।


पत्रकारों पर कार्रवाई, माफिया बेखौफ
पड़ोसी जिलों में अवैध खनन उजागर करने वाले पत्रकारों पर केस दर्ज होने की घटनाएं सामने आने के बाद मंडला में भी सवाल उठ रहे हैं—
क्या खनन माफिया पर कार्रवाई की बजाय आवाज उठाने वालों को दबाया जा रहा है?


विभाग कटघरे में
खनिज विभाग से सीधे सवाल:
अवैध उत्खनन वाले क्षेत्रों की आखिरी संयुक्त जांच कब हुई?
रात में निकलने वाले रेत के ट्रकों पर कार्रवाई क्यों नहीं?
ग्राम सभाओं की आपत्तियों को क्यों नजरअंदाज किया गया?
लाइसेंसधारकों की आड़ में हो रहे अवैध खनन पर क्या कार्रवाई हुई?


जिला प्रशासन से सवाल:
खनिज विभाग की स्वतंत्र जांच कब होगी?
पर्यावरणीय क्षति की भरपाई कौन करेगा?
राजस्व चोरी की जिम्मेदारी तय होगी या नहीं?


सरकार को करोड़ों का नुकसान
मुरूम और रेत के अवैध उत्खनन से जहां निर्माण कार्य चल रहे हैं, वहीं सरकारी खजाने को भारी राजस्व हानि हो रही है।


विशेषज्ञों की चेतावनी
यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो
मंडला का पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ जाएगा
वन्यजीव कॉरिडोर खत्म हो सकते हैं
जल संकट गहरा सकता है


जनता की मांग
खनिज विभाग की उच्च स्तरीय जांच
अवैध खनन पर तत्काल रोक
संयुक्त टीम से जमीनी सर्वे


दोषियों पर आपराधिक कार्रवाई
(रेवांचल टाईम्स की यह विशेष खोजी रिपोर्ट—अगले अंक में अवैध खनन के हॉटस्पॉट, परिवहन मार्ग और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर बड़ा खुलासा किया जाएगा।)

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