योजना भवन में गरजी मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस, लंबित क्रमोन्नति-पदोन्नति पर कड़ा रुख

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।
मंडला के योजना भवन में आयोजित परामर्शदात्री बैठक में शिक्षकों की लंबित क्रमोन्नति, पदोन्नति और उच्च पद प्रभार के मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली। मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस की मंडला शाखा के पदाधिकारियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जिले के अधिकांश पात्र शिक्षक वर्षों से फाइलों के चक्कर काट रहे हैं।


संघ का कहना है कि गोपनीय चरित्रावली कार्यालय में जमा होने के बावजूद बार-बार वही दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिससे शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। बैठक में कार्यालय पत्र क्रमांक वित्त/1/2026/191 मंडला तथा कार्या./आ.जन/वि. म.प्र. शि.स्था.–03/1005/2026/3459 भोपाल दिनांक 16/02/2026 का हवाला देते हुए कहा गया कि आवश्यक जानकारी उपलब्ध होने के बाद भी प्रकरण लंबित रखे गए हैं।


जिला अध्यक्ष राजेश महोबिया ने दो टूक कहा,
“पदोन्नति हेतु गोपनीय चरित्रावली समय पर जमा है, फिर भी बार-बार अभिलेख मांगना शिक्षकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है। पात्र शिक्षकों को चतुर्थ वेतनमान समय पर मिले, यह प्रशासन की जिम्मेदारी है।”


व्यक्तिगत प्रकरणों पर भी उठी आवाज
बैठक में कई शिक्षकों के नाम लेकर लंबित मामलों को सामने रखा गया—
श्रीमती आभा वर्मा, उच्च माध्यमिक शिक्षक, पीएम श्री शासकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय महाराजपुर (मंडला) – द्वितीय क्रमोन्नति लंबित।
राजेश महोबिया, उच्च श्रेणी शिक्षक, शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय घाघा – तृतीय क्रमोन्नति लंबित।


आरती तिवारी, उच्च श्रेणी शिक्षक, शासकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय घाघा – तृतीय क्रमोन्नति लंबित।
संघ का कहना है कि ये केवल उदाहरण हैं, वास्तविक संख्या कहीं अधिक है। जिले में 12 और 24 वर्ष की सेवा पूर्ण कर चुके अनेक शिक्षक उच्च पद प्रभार और क्रमोन्नति की प्रतीक्षा में हैं। एरियर्स का भुगतान भी लंबित है, जिससे आर्थिक नुकसान हो रहा है।


ज्ञापन के बावजूद कार्रवाई नहीं
संघ ने बताया कि 14/10/2025 को जिला शिक्षा अधिकारी को विधिवत ज्ञापन दिया गया था, परंतु अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। विशेष रूप से एक हाई स्कूल में पी.टी.आई. को प्रभारी प्राचार्य बनाए जाने पर आपत्ति जताई गई। संघ के अनुसार विद्यालय में छह वरिष्ठ शिक्षक पदस्थ होने के बावजूद वरिष्ठता की अनदेखी की गई।


फाइलों का जाल खत्म हो”
बैठक में मांग की गई कि कार्यालयीन प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो। बार-बार अभिलेख मांगने की प्रवृत्ति पर रोक लगे। संघ ने सुझाव दिया कि जिले में विशेष प्रकोष्ठ बनाकर सभी लंबित क्रमोन्नति-पदोन्नति प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण किया जाए तथा ऑनलाइन ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जाए।


प्रशासन पर बढ़ता दबाव
बैठक में यह सवाल बार-बार उठा—
“जब शिक्षक ही हतोत्साहित होंगे तो गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे संभव है?”
संघ ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि शीघ्र निराकरण नहीं हुआ तो आंदोलन की रूपरेखा तय की जाएगी।


योजना भवन में हुई इस बैठक ने संकेत दे दिया है कि शिक्षकों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। लंबित फाइलें, दस्तावेजों की पुनरावृत्ति और वरिष्ठता की अनदेखी—इन सब पर संघ ने कड़ा रुख अपना लिया है।
अब मंडला जिले के शिक्षकों की निगाहें प्रशासनिक निर्णय पर टिकी हैं—क्या फाइलें रफ्तार पकड़ेंगी या संघर्ष की राह और तेज होगी?

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