वनग्राम बौना बालक आश्रम में जैविक सब्जियों का हो रहा उत्पादन

बच्चों की थाली में नियमित मिल रहा ताजा हरी साग भाजी का पोषण,

दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग – वनग्राम बौना स्थित आदिवासी बालक आश्रम में बच्चों के सर्वांगीण विकास की दिशा में एक सराहनीय पहल देखने को मिल रही है। आश्रम अधीक्षक की पहल पर छात्रावास परिसर में जैविक सब्जी वाटिका विकसित की गई है, जहां बिना रासायनिक खाद के विभिन्न प्रकार की हरी सब्जियों का उत्पादन किया जा रहा है।

50 सीटर बालक आश्रम परिसर में पालक, मैथी, धनिया, लालभाजी, टमाटर एवं गोभी जैसी मौसमी सब्जियां उगाई गई हैं। इन सब्जियों का नियमित उपयोग बच्चों के भोजन में किया जा रहा है, जिससे उन्हें ताजा, पौष्टिक और सुरक्षित आहार मिल रहा है। अब बच्चों को बाजार की महंगी और रसायनयुक्त सब्जियों पर निर्भर नहीं रहना पड़ रहा है।

सब्जी वाटिका की देखरेख छात्रावास में पदस्थ कर्मचारियों एवं चौकीदार द्वारा की जा रही है। सुबह-शाम निराई, गुड़ाई और सिंचाई के माध्यम से फसलों की देखभाल की जाती है। वहीं बच्चों को भी खेती की प्रक्रिया से जोड़ा गया है, जिससे वे जैविक खेती, श्रम और आत्मनिर्भरता का महत्व सीख रहे हैं।

आश्रम अधीक्षक सुभाष बगदारिया ने बताया कि वर्तमान में पालक, मैथी, धनिया और लालभाजी का प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है। वहीं परिसर के दोनों ओर सैकड़ों की संख्या में लगाए गए टमाटर और गोभी के पौधों में फूल आ चुके हैं, जो आगामी सप्ताह में उपयोग योग्य हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि यह पूरा कार्य स्वयं के खर्च से किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य बच्चों को रसायनमुक्त भोजन उपलब्ध कराना और उनकी सेहत को बेहतर बनाना है।

आश्रम परिसर की बाउंड्रीवाल पर उकेरी गई पारंपरिक गोंडी पेंटिंग भी लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही है। आदिवासी संस्कृति और हरियाली से सजा यह परिसर एक सकारात्मक और प्रेरणादायक वातावरण प्रस्तुत करता है।

हालांकि, छात्रावास भवन की स्थिति पर ध्यान देने की आवश्यकता है। भवन में रंग-रोगन और मरम्मत की दरकार बनी हुई है। यदि इस दिशा में भी आवश्यक कदम उठाए जाएं, तो यह आश्रम बच्चों के लिए और अधिक सुरक्षित व अनुकूल वातावरण प्रदान कर सकेगा।

स्थानीय ग्रामीणों एवं अभिभावकों ने आश्रम की इस पहल की सराहना करते हुए इसे अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए प्रेरणास्रोत बताया है। जैविक खेती, पारंपरिक कला और व्यवहारिक शिक्षा का यह समन्वय बच्चों को प्रकृति से जोड़ने का सफल प्रयास माना जा रहा है।

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