गोंगापा के प्रदेश अध्यक्ष पहुंचे डोलामाईट खनन क्षेत्र ग्रामीणों से किया संवाद घटना की निंदा कहा पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र का गला घोटना

रेवाँचल टाईम्स – मण्डला, जिले के विकास खंड भुआ बिछिया के ग्राम ककैया डोलामाईड खदान में तथाकथित लोगो के द्वारा पत्रकारों साथ किए गए अभद्र व्यवहार का मामला चर्चा में आ गया है। बिछिया विधानसभा के कान्हा क्षेत्र से लगे ककैया डोलामाईट माईन्स तहसील बिछिया में एक अनोखी खदान संचालित है। जिसका सूचना बोर्ड में दर्ज नाम अनुसार मैं. विनोद कुमार अग्रवाल ककैया डोलामाईट माईन्स जिसका खसरा क्रमांक 1472 रकवां नंबर 6.81 हेक्टेयर जिसका अवधि 14.08.2002 से 13 अगस्त 2052 अवधि तक के लिए संचालित खदान बताया गया है।

यह खदान इन दिनों विवाद के घेरे में आ गई है। इस खदान में अवैध ब्लास्टिंग के अनेक मामले सामने आ चुकें हैं हेवी ब्लास्टिंग के चलते आसपास के रहवासियों का जीना मुश्किल हो गया है। वहीं सरकारी सम्पत्ति जिसमें शासकीय स्कूल सहित आंगनबाड़ी भी शामिल है को भी नुकसान हुआ है।

लेकिन प्रशासन जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रहा है। मामला काफी गंभीर है और इस पूरे मामले में खनिज अधिकारी की मिलीभगत बताई जाती है खनिज अधिकारी के संरक्षण में इस खदान संचालक को अभयदान दिया गया है।

जिसके चलते अवैध खनन परिवहन सरकारी सम्पत्ति का नुकसान आम बात हो गई है यहीं नही इस खदान में किसी को घुसने की परमिशन भी नही है। यहां पदस्थ अमला आप पर झूठा केश प्रकरण शिकायत एफआईआर करने के लिए हर दम तैयार रहता है डरे सहमे ग्रामीण जोकि आदिवासी सहित अन्य समाज समाज से तालूकात रखते हैं वे अब खुलकर कुछ नही बोल पा रहे है चांदी के सिक्कों के आगे पूरा प्रशासन बिका नजर आ रहा है वहीं पत्रकार के साथ की गई अभद्रता और बंधक बनाए जाने के घटना के बाद भी जिला जनसम्पर्क अधिकारी खमोश बैठे हैं

अभी तक जन सम्पर्क अधिकारी ने पत्रकार से इस संबंध में कोई संवाद नही किया है। लिहाजा ऐसा प्रतीत होता है कि इस खदान संचालक को भाजपा ही नही कांग्रेस का अभयदान मिला हुआ है। वही बिछिया विधायक भी खमोश हैं तो दूसरी तरफ समाचार प्रकाशन के बाद गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष कमलेश तेकाम खुलकर सामने आ गए और उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर हमला लोकतंत्र का गला घोटने का समान है

और शुक्रवार को कमलेश तेकाम अपने साथियों के साथ बीजेगांव ककैया पहुंचे जहां पर स्कूल का निरीक्षण किया और स्थानीय ग्रामीणों से संवाद किया। जब उन्होंने हालात देखे तो उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन गजब तरीके से संचालित हो रहा है। वहीं घटना की वस्तुस्थिति को लेकर पत्रकारों का एक दल फिर खदान स्थल के समीप पहुंचा जहां पर कवरेज के दौरान फिर पत्रकारों के साथ अभद्रता करने की कोशिश की गई जबकि पत्रकारों ने बम्हनी थाना प्रभारी से मिलकर वस्तुस्थिति बताते हुए सुरक्षा की मांग की थी

वहीं दूसरी तरफ सूत्रों का कहना है कि इस फर्म की इस क्षेत्र में अनेक खदाने संचालित है कुछ खदाने बंद पड़ी है लेकिन इन खदानों की रॉयल्टी उपयोग में ली जा रही है क्या सहीं है और क्या गलत खनिज अधिकारी ही बता पायेंगे लेकिन खनिज कार्यालय में तो पैसे वालों के ही काम होते हैं आम इंसान यहां पर केवल नियम कायदों में उलझ कर रह जाता है

वहीं दूसरी तरफ प्रदेश अध्यक्ष कमलेश तेकाम ने स्पष्ट कहा कि मैं पत्रकारों के साथ हूं और शीघ्र ही जिला प्रशासन के साथ के विरोध में धरना प्रदर्शन होगा बता दें कि इस खदान में बड़ी बड़ी मशीनों से जमीन का सीना छलनी कर बेतहाश मात्रा में डोलामाईड निकाला जा रहा है। वहीं ग्राम पंचायत ककैया भी जबावदार लोग भी इस गंभीर मामले में खमोश बैठे हैं वहीं सूत्रों का कहना है कि ग्राम पंचायत से एनओसी जारी हुई कि नही यह भी स्पष्ट नही हो पा रहा है यहां के सरपंच हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

फाईल की गहन जांच के साथ वास्तुस्थिति जनता के समक्ष सामने आनी चाहिए इस पूरे मामले से मंडला जिले के ईमानदार कलेक्टर सोमेश मिश्रा की छवि को धूमिल किए जाने का प्रयास भी बताया गया है। कलेक्टर के नाम से खनिज विभाग में एक अलग ही खेल चल रहा है वहीं बिछिया एसडीएम सोनाली देव ने जांच किए जाने की बात कहीं है तो वहीं शुक्रवार को खनिज विभाग का दल इस क्षेत्र में पहुंचा था

लेकिन क्या पाया क्या देखा कुछ भी स्पष्ट नही हो पाया है फिलहाल इस घटना को लेकर पूरे प्रदेश के पत्रकार लामबंद होने जा रहे हैं मंडला जिले में वैसे भी लगातार पत्रकारों के साथ अव्यवहार के साथ अभद्रता किए जाने के अनेक मामले सामने आ चुकें है जिसकी निंदा देश और प्रदेश की नामचीन पत्रकारों ने अनेक मंचो ंसे की है। वहीं इस खदान में बड़ी-बड़ी मशीनों से जमीन का सीना छलनी कर डोलामाइड निकाला जाता है।

जो महानगरों की ओर भेजा रहा है ओवरलोड वाहनों ने सरकारी सडक़ो का दम निकाल दिया है तो दूसरी तरफ अवैध ब्लास्टिंग से पूरा काम चलता है। खदान की चट्टानों में बड़े-बड़े होलकर बड़ी ब्लास्टिंग की जाती है।

जिससे आसपास के गांव कंपन की चपेट में आ जाते हैं। बाहुबलि और पैसे की दम पर संचालित इन खदानों पर न तो कभी जांच टीम जाती है और न ही कभी इन खदानों का भौतिक सत्यापन होता है कागजों में सब सही चल रहा है लेकिन मौंका स्थल कुछ और बयान करता है।

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