नैनपुर जनपद की ग्राम पंचायतों में सबसे ज्यादा मनमानी, प्रशासन मौन
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।
आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में शासकीय व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं। जिले में पदस्थ कई शिक्षक, पटवारी, एएनएम और महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने निर्धारित मुख्यालय में रहने के बजाय मनमानी कर रहे हैं।
हालत यह है कि जिन कर्मचारियों को मुख्यालय में रहने के सख्त निर्देश दिए गए हैं, वही कर्मचारी आदेशों को ठेंगा दिखाकर महीनों तक मुख्यालय से नदारद रहते हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कर्मचारियों की इस लापरवाही का सीधा असर शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व व्यवस्था पर पड़ रहा है। कई सरकारी स्कूलों में शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते, पटवारी गांवों में उपलब्ध नहीं रहते और स्वास्थ्य सेवाएं भी प्रभावित हो रही हैं।
इसके बावजूद जिला प्रशासन द्वारा इस गंभीर समस्या पर ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार सबसे ज्यादा मनमानी जनपद पंचायत नैनपुर की कई ग्राम पंचायतों में देखने को मिल रही है, जहां शिक्षक, पटवारी और स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी मुख्यालय में रहना तो दूर, कई-कई दिनों तक गांवों में दिखाई तक नहीं देते।
ग्रामीणों का कहना है कि अगर अधिकारी अचानक निरीक्षण करें तो कई पदस्थ कर्मचारी मुख्यालय से अनुपस्थित मिलेंगे।
लगातार इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने के बावजूद शासन-प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। आखिर जिले के जिम्मेदार अधिकारी अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर निगरानी क्यों नहीं रख पा रहे हैं?
जनता की मांग है कि शासन प्रशासन ऐसे कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें मुख्यालय में रहने के निर्देश कड़ाई से लागू करे। साथ ही जो कर्मचारी लगातार मुख्यालय से अनुपस्थित पाए जाएं, उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि शिक्षा, स्वास्थ्य और राजस्व व्यवस्था पटरी पर आ सके।
