दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।
मंडला जिले में पुलिस अधीक्षक द्वारा अवैध गतिविधियों पर सख्त कार्रवाई के लगातार दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। मोहगांव थाना क्षेत्र में खुलेआम सट्टा कारोबार फल-फूल रहा है और आरोप सीधे तौर पर थाना प्रभारी की कार्यशैली और कथित संरक्षण पर लग रहे हैं। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर पुलिस कप्तान के सख्त निर्देशों के बावजूद मोहगांव में सट्टा माफिया इतने बेखौफ कैसे हैं?
सूत्रों की मानें तो मोहगांव में बैठे खाईबाज खुलेआम सट्टा पट्टी ले रहे हैं। इतना ही नहीं, गांव-गांव और कस्बों में अपने प्रतिनिधि नियुक्त कर दिए गए हैं जो मोबाइल के माध्यम से सट्टा पट्टी इकट्ठा कर मुख्य खाईबाज तक पहुंचाते हैं और बदले में मोटा कमीशन लेते हैं।
मोहगांव, मुगवानी, मनु, चाबी, रेगांव, सिंगापुर सहित आसपास के कई गांवों में सुबह से रात तक सट्टे के अंकों की चर्चा आम हो चुकी है। चौक-चौराहों और दुकानों पर लोग खुलेआम पूछते सुने जा सकते हैं—“आज क्या बना… कौन सा नंबर आया?”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सब पुलिस की जानकारी के बिना संभव ही नहीं है। नाम न छापने की शर्त पर कई ग्रामीणों ने बताया कि थाना स्तर पर बैठे जिम्मेदार अधिकारियों को पूरे नेटवर्क की जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होती। उल्टा यह चर्चा है कि सट्टा संचालकों को अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है।
सबसे गंभीर आरोप यह भी सामने आ रहे हैं कि जैसे ही मंडला से कार्रवाई के आदेश आते हैं, उसकी भनक पहले ही मोहगांव में बैठे सट्टा संचालकों तक पहुंच जाती है। ऐसे में वे कुछ समय के लिए अपना काम बंद कर देते हैं और मामला ठंडा पड़ते ही फिर से वही धंधा शुरू हो जाता है।
जब शिकायतें ज्यादा बढ़ती हैं तो पुलिस छोटी-मोटी कार्रवाई कर कागजी खानापूर्ति करती है और प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह बताया जाता है कि सटोरियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की गई। लेकिन हकीकत यह है कि छोटे लोगों को पकड़कर वाहवाही लूट ली जाती है और बड़े सट्टा संचालक पुलिस की पकड़ से हमेशा बाहर रहते हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मोहगांव थाना क्षेत्र में कानून का राज है या सट्टा माफिया का?
क्या पुलिस कप्तान को इस पूरे खेल की जानकारी नहीं है, या फिर कार्रवाई केवल दिखावे तक सीमित है?
ग्रामीणों का कहना है कि सट्टे के इस खुले खेल ने गरीब और मजदूर वर्ग को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। कई परिवारों की मेहनत की कमाई सट्टे की लत में बर्बाद हो रही है, युवा पीढ़ी गलत रास्ते की ओर धकेली जा रही है और गांवों का सामाजिक माहौल बिगड़ रहा है।
अब सवाल यह है कि क्या जिले के पुलिस कप्तान मोहगांव में चल रहे इस सट्टा नेटवर्क की निष्पक्ष जांच कराएंगे?
क्या थाना प्रभारी की भूमिका की भी जांच होगी?
या फिर गरीबों की मेहनत की कमाई लूटने वाला यह खेल यूं ही चलता रहेगा और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे रहेंगे?
जनता अब जवाब चाहती है — कार्रवाई होगी या सिर्फ दावे और प्रेस नोट ही जारी होते रहेंगे?
