सुरंगवानी में वन विभाग की मनमानी चरम पर

ग्रामीणों का आरोप वन रक्षक युवराज ठाकुर ने भ्रष्टाचार को बनाया रोज़गार

रेवांचल टाइम्स मंडला आदिवासी बहुल जिला मंडला, जो वर्षों से अपनी बहुमूल्य वन संपदा और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है, आज वन विभाग की कथित लापरवाही और भ्रष्टाचार का शिकार बनता जा रहा है। मंडला पश्चिम वन मंडल अंतर्गत सुरंगवानी वन ग्राम में पदस्थ बीट गार्ड युवराज सिंह ठाकुर पर वित्तीय अनियमितताओं शासकीय योजनाओं में घोटाले और ग्रामीणों को धमकाने जैसे आरोप लगे हैं। आक्रोशित ग्रामवासियों ने एक स्वर में उन्हें तत्काल हटाने और उनकी आय–संपत्ति की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।


वन सुरक्षा समिति को बनाया निजी जागीर
ग्रामीणों का आरोप है कि युवराज सिंह ठाकुर ने सुरंगवानी वन सुरक्षा समिति को अपनी निजी जागीर बना लिया है। जब से उनकी पदस्थापना हुई है, तब से समिति के खातों का कोई लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया गया। न आय-व्यय की जानकारी दी जाती है, न कैश बुक, चेक बुक और पासबुक समिति के सदस्यों को दिखाई जाती है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है तो फिर जानकारी छिपाने की जरूरत क्यों पड़ रही है ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार मांग करने के बावजूद उन्हें केवल टालने वाले जवाब मिले या फिर खुलेआम धमकाया गया।


सीसी सड़क के नाम पर मुर्रम घोटाला
सत्र 2022–23 में शासन द्वारा स्वीकृत सीसी सड़क निर्माण कार्य भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। जहां गुणवत्तापूर्ण सीमेंट कंक्रीट सड़क बननी थी, वहां केवल मुर्रम और पत्थर डालकर खानापूर्ति कर दी गई। लाखों रुपये की लागत बताकर घटिया सड़क बना दी गई।
ग्रामीणों का सीधा सवाल है क्या यह लापरवाही है या सुनियोजित भ्रष्टाचार
और यदि ऐसा है तो संबंधित अधिकारियों ने आंखें मूंदकर भुगतान कैसे कर दिया


लाभांश वितरण में खुला खेल, चुनिंदा लोगों को फायदा
वन सुरक्षा समिति के माध्यम से मिलने वाली लाभांश राशि के वितरण में भी जमकर मनमानी की गई। आरोप है कि कुछ खास लोगों के खातों में पूरी राशि डाल दी गई, जबकि कई पात्र ग्रामीणों के खातों में एक रुपया भी नहीं पहुंचा। जब पीड़ित ग्रामीणों ने इस भेदभाव पर सवाल उठाए, तो उन्हें डराया धमकाया गया।


ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि आदिवासी समुदाय के अधिकारों पर सीधा हमला है।
अग्नि सुरक्षा राशि में फर्जीवाड़ा, फिर भी वापसी कैसे
ग्रामीणों ने यह सवाल भी उठाया है कि पूर्व में अग्नि सुरक्षा मद की राशि फर्जी तरीके से आहरण करने के प्रयास में जिस वन रक्षक को हटाया गया था, उसे दोबारा सुरंगवानी बीट में कैसे पदस्थ कर दिया गया।


क्या विभागीय जांच केवल दिखावा थी या फिर अंदरखाने सब कुछ “मैनेज” कर लिया गया यह मामला पूरे वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।


शासकीय काम छोड़ ठेकेदारी में व्यस्त
ग्रामीणों का आरोप है कि वन रक्षक युवराज सिंह ठाकुर शासकीय कर्तव्यों से ज्यादा अपने निजी ठेकेदारी कार्यों में रुचि रखते हैं। वे अधिकांश समय फील्ड से नदारद रहते हैं। वन गश्त, संरक्षण और ग्रामीणों से संवाद जैसे जरूरी कार्य पूरी तरह उपेक्षित हैं।परिणामस्वरूप वन सुरक्षा समिति के कार्य ठप पड़े हैं और ग्रामीण योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। जंगलों की सुरक्षा भगवान भरोसे छोड़ दी गई है।


समिति का कार्यकाल खत्म, चुनाव जानबूझकर रोके गए
वन सुरक्षा समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है, इसके बावजूद आज तक नए चुनाव नहीं कराए गए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुराने पदाधिकारियों और वन रक्षक की मिलीभगत से जानबूझकर चुनाव प्रक्रिया रोकी जा रही है, ताकि वर्षों से चली आ रही अनियमितताओं पर पर्दा डाला जा सके।यदि चुनाव हो गए तो आय–व्यय का पूरा सच सामने आ जाएगा — यही डर सबको सता रहा है।


वन विभाग मौन, ग्रामीणों में उबाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने आरोपों के बावजूद वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी चुप क्यों हैं
क्या आदिवासी गांव होने के कारण सुरंगवानी की आवाज़ को अनसुना किया जा रहा है
ग्रामीणों का कहना है कि वन रक्षक युवराज सिंह ठाकुर को तत्काल सुरंगवानी बीट से हटाया जाए


सत्र 2022–23 से अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन की जांच हो
लाभांश वितरण की पुनः समीक्षा की जाए।आय और संपत्ति की जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए
वन सुरक्षा समिति का तत्काल चुनाव कराया जाए।अब यह देखना होगा कि वन विभाग आदिवासी ग्राम सुरंगवानी के आक्रोश को गंभीरता से लेता है या फिर भ्रष्टाचार पर एक बार फिर पर्दा डाल दिया जाएगा।

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