स्नेह का पावन पर्व — राखी का उत्सव पवई उपजेल में बहनों ने कैदियों की कलाइयों पर बांधी राखी रेवान्चल टाइम्स, पवई (पन्ना)

त्योहारों का देश भारत

भारत त्योहारों का देश है, जहाँ हर महीने कोई न कोई पर्व मनाया जाता है। हमारे देश की सांस्कृतिक धरोहर इतनी समृद्ध है कि यहां उत्सव मनाने के लिए हमेशा कोई न कोई बहाना मिल ही जाता है। इन्हीं में से एक है भाई-बहन के पवित्र रिश्ते का पर्व रक्षाबंधन, जो एक कच्चे धागे को पक्के विश्वास और स्नेह में बदल देता है।

नगर में हर्षोल्लास का माहौल

श्रावण पूर्णिमा, शनिवार को नगर एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रक्षाबंधन पारंपरिक रीति-रिवाज और उल्लास के साथ मनाया गया।
सुबह से ही चहल-पहल शुरू हो गई थी। उमस और गर्मी के बावजूद बहनों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। घर-घर में बहनों ने भाई की कलाई पर राखी बांधी और उनकी लंबी उम्र की कामना की, वहीं भाइयों ने बहनों को उपहार देकर जीवनभर रक्षा का वचन दिया।

The holy festival of affection - Rakhi celebration for sisters in Powai sub-jail
The holy festival of affection – Rakhi celebration for sisters in Powai sub-jail

प्राचीन कथा का संदर्भ

महाभारत में वर्णित कथा के अनुसार, शिशुपाल वध के समय श्रीकृष्ण की तर्जनी में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का टुकड़ा बांध दिया था। बदले में श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की लाज बचाई। इसी भावनात्मक जुड़ाव को रक्षाबंधन का आधार माना जाता है।

उपजेल में विशेष आयोजन

मुख्यालय पवई स्थित उपजेल में भी रक्षाबंधन का खास आयोजन हुआ। कैदियों की बहनें जेल पहुंचीं और अपने भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधी।
बहनों ने भगवान से प्रार्थना की कि उनके भाई नेक इंसान बनें और अपराधों से दूर रहें। राखी बंधवाने के बाद कैदियों ने संकल्प लिया कि वे अब कानून का उल्लंघन नहीं करेंगे और किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे।

पर्व का संदेश

रक्षाबंधन केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि भाई-बहन के रिश्ते को मजबूती देने का वचन है। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि भाई का फर्ज है बहन की रक्षा करना और बहन की भावना है कि उसका भाई हर संकट से दूर रहे।

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