जल संकट की मार: धनौली में पानी की समस्या से जूझ रहे किसान और मजदूर परिवार

Revanchal
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चौरा टोला में जलसंकट गहराया

नलजल योजना की पाइप लाइन में आज तक नहीं आया पानी

दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग – अप्रैल की शुरुआत के साथ ही भीषण गर्मी ने ग्रामीण इलाकों में अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। विकासखंड से लगभग नौ किलोमीटर दूर बसे ग्राम धनौली के चौराटोला में जल संकट अब विकराल रूप लेता जा रहा है।

हालात ऐसे हैं कि यहां के किसान और मजदूर परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी पानी की जद्दोजहद में सिमटकर रह गई है।
गांव के मुख्य मार्ग के किनारे स्थित एकमात्र सार्वजनिक कुआं, जो कभी पूरे मोहल्ले की प्यास बुझाता था, अब सूखने की कगार पर है। कुएं के भीतर झांकने पर साफ दिखाई देता है कि तलहटी में बस थोड़ी सी गंदली पानी की परत बची है, जिससे मुश्किल से कुछ परिवारों का ही गुजारा हो पा रहा है। दीवारों पर जमी परतें और नीचे गिरता जलस्तर इस संकट की गंभीरता को बयां कर रहे हैं।


सुबह होने से पहले ही गांव में हलचल शुरू हो जाती है। महिलाएं और पुरुष अंधेरे में ही बर्तन लेकर आधा किलोमीटर दूर स्थित कुएं की ओर निकल पड़ते हैं। पानी भरने के लिए लोग अपनी बारी का इंतजार करते और घंटों इंतजार के बाद कहीं जाकर गुजारा करने लायक पानी नसीब हो पाता है।

दिनभर मजदूरी या खेती करने वाले इन परिवारों के लिए यह संघर्ष और भी कठिन हो जाता है। गांव के लोग कुएं के पास खड़े होकर पानी की समस्या बताते फिर रहे हैं। महिलाओं के लिए भी परेशानी बढ़ गई है, वहीं ग्रामीण हालात की गंभीरता को समझते हुए जल्द समाधान की उम्मीद लगाए हुए हैं
ग्रामीणों का कहना है कि एक वर्ष पहले नल-जल योजना के तहत पाइपलाइन बिछाई गई थी,

लेकिन आज तक उसमें पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पाई। जमीन के नीचे पड़ी पाइपलाइन अब केवल एक अधूरी योजना का प्रतीक बनकर रह गई है। यदि समय रहते यह योजना चालू हो जाती, तो शायद आज यह स्थिति नहीं बनती।


नजदीकी खाल्हे टोला में निजी कुएं जरूर हैं, लेकिन वहां पहुंच पाना हर किसी के लिए संभव नहीं है। कुछ स्थानों पर कच्ची बाउंड्री बंधेज के कारण आम ग्रामीणों को पानी नहीं मिल पा रहा है, जिससे समस्या और बढ़ जाती है। एक झिरिया भी है, पर वहां भी सीमित लोगों को ही पानी मिल पाता है।


करीब पचास परिवार इस जल संकट से सीधे प्रभावित हैं। सोमनाथ पंद्राम, छिद्दी यादव, झमकी बाई सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि “पानी के लिए रोज सुबह चार बजे उठना पड़ता है, नहीं तो पूरे दिन के लिए पानी नहीं मिल पाता। काम पर भी जाना होता है, ऐसे में बहुत परेशानी होती है।”


यह हालात साफ संकेत दे रहे हैं कि यदि जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाले दिनों में संकट और गहरा सकता है। प्रशासन की ओर से तत्काल हस्तक्षेप और नल-जल योजना को चालू करने की जरूरत है, ताकि इन मेहनतकश परिवारों को राहत मिल सके।

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