उम्र को दी मात: 60 की उम्र में जगा ‘उमंग’, छिंदवाड़ा की महिलाओं ने समाजसेवा के लिए बनाया ‘उमंग क्लब’

Revanchal
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​ रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा

“उम्र सिर्फ एक संख्या है, जज़्बा और जज्बात कभी बूढ़े नहीं होते!” इसी सोच को सच साबित कर दिखाया है छिंदवाड़ा की वरिष्ठ महिलाओं ने। 60 वर्ष की उम्र पार करने के बाद जहाँ लोग खुद को सिमटा लेते हैं, वहीं इन महिलाओं ने समाज सेवा के ज़रिए नई ऊर्जा और नया जीवन जीने का बीड़ा उठाया है। छिंदवाड़ा में ‘उमंग क्लब’ का गठन किया गया है, जिसके बैनर तले 60 से अधिक उम्र की महिलाएँ जरूरतमंदों की मदद और सामाजिक बदलाव के लिए सक्रिय रहेंगी।


उम्र के 60 पड़ाव पार कर चुकीं इन महिलाओं का उत्साह देखकर कोई यह नहीं कह सकता कि ये ढलती उम्र के साए में हैं। छिंदवाड़ा में आयोजित एक गरिमामय कार्यक्रम के दौरान पूजन-अर्चन के साथ ‘उमंग क्लब’ की नींव रखी गई।

30 से अधिक महिलाएँ जुड़ीं,शुरुआती कार्यक्रम में ही लगभग 30 वरिष्ठ महिलाओं ने क्लब की सदस्यता लेकर समाजसेवा का संकल्प लिया।
सांस्कृतिक रंग और आदिवासी नृत्य कार्यक्रम में आदिवासी बालिकाओं ने मनमोहक गीत और नृत्य प्रस्तुत किया। महिलाओं ने खुद को रोक न सकीं और बच्चों के साथ कदम से कदम मिलाकर आदिवासी धुनों पर जमकर थिरकीं।
बच्चों को बांटी खुशियाँ
आयोजन के अंत में जरूरतमंद बच्चों को ड्रेस और प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के सफल आयोजन में श्वेता पाटनी का भी सराहनीय योगदान रहा।

​ सतनाम सलूजा अध्यक्ष, उमंग क्लब
​”60 वर्ष की उम्र के बाद अक्सर लोग सोचते हैं कि हम कमजोर हो गए हैं, लेकिन उम्र तो सिर्फ एक नंबर है। हम पूरी तरह से तंदुरुस्त हैं और समाज के लिए बहुत कुछ करना चाहती हैं। जरूरतमंदों की मदद और सेवा ही ‘उमंग क्लब’ का मुख्य उद्देश्य है।”

​ सीमा गुगनानी उपाध्यक्ष, उमंग क्लब
​”हमारे क्लब का मुख्य उद्देश्य समाजसेवी के रूप में कार्य करना है। समाज के जो जरूरतमंद लोग हैं, उनके लिए हम निरंतर विभिन्न प्रकार की सेवा गतिविधियाँ संचालित करते रहेंगे।”

“छिंदवाड़ा की इन महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि सेवा, उत्साह और सामाजिक जिम्मेदारी निभाने के लिए कोई उम्र छोटी या बड़ी नहीं होती। ‘उमंग क्लब’ का यह सफर न केवल समाज के जरूरतमंदों के चेहरों पर मुस्कान लाएगा, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा का जरिया बनेगा।

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