मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग, भोपाल ने किया 05 मामलो में संज्ञान”

मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग, भोपाल ने किया 05 मामलो में संज्ञान”

रेवाँचल टाईम्स – मध्यप्रदेश मानव अधिकार आयोग के माननीय अध्यक्ष(कार्यवाहक) श्री राजीव कुमार टंडन ने विगत दिवस के विभिन्न समाचार पत्रों में प्रकाशित प्रथम दृष्टया मानव अधिकार उल्लंघन के ”05 मामलों में” संज्ञान लेकर संबंधितों से जवाब मांगा है।जिसमे 1 मामला मण्डला जिले के हैं। आयोग ने संबंधितों से जवाब मांगा है।

मण्डला -जिले के 1 मामला जो समाचार पत्रों मे प्रकाशित हुए थे जिसमें प्रथम दृष्टया मानव अधिकार का उल्लंघन है ऐसे मामले को संज्ञान मे लेकर संबंधितों से जवाब मांगा है। इस बात की जानकारी कार्यालय म. प्र. मानव अधिकार आयोग-मित्र, शिकायत प्रकोष्ठ शाखा मण्डला से प्राप्त हुई है।

टीआई पर लगाये प्रताड़ित करने का आरोप…

मंडला जिले के महाराजपुर थाना क्षेत्र में एक दंपति ने थाना प्रभारी द्वारा प्रताड़ना करने और थर्ड डिग्री का इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लगाने का मामला सामने आया है। जिसकी शिकायत लेकर ग्रामीण जनसुनवाई में पहुंचे। मामले में संज्ञान लेकर मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने पुलिस अधीक्षक, मंडला से मामले की जांच कराकर की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन एक माह में मांगा है।

Madhya Pradesh Human Rights Commission, Bhopal took cognizance in 05 cases.
Madhya Pradesh Human Rights Commission, Bhopal took cognizance in 05 cases.

एवं 5 में से एक मामला पूरे प्रदेश के लिए–

हेल्थ विभाग के 30 हजार से ज्‍यादा आउटसोर्स कर्मियों को महीनों से नहीं मिला वेतन..

वही मध्यप्रदेश के 30 हजार से अधिक आउटसोर्स स्‍वास्‍थ्‍य कर्मचारियों को बीते कई माह से वेतन नहीं मिलने का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के विभिन्न शासकीय अस्पतालों में विगत कई वर्षों से आउटसोर्स कर्मी कार्यरत है, लेकिन उन्हें एनएचएम और स्वास्थ्य विभाग एवं निजी आउट सोर्स एजेंसी द्वारा विगत कई माह से वेतन भुगतान नहीं किया जा रहा है, इस कारण उन्‍हें जीवन यापन करने में कई तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में आउटसोर्स कर्मियों ने संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को ज्ञापन भी सौंपा जा चुका है, फिर भी कर्मचारियों की समस्या दूर नहीं हो पाई है। मामले में संज्ञान लेकर मध्‍यप्रदेश मानव अधिकार आयोग ने प्रमुख सचिव, स्‍वास्‍थ्‍य एवं चिकित्‍सा शिक्षा, भोपाल से मामले की जांच कराकर की गई कार्यवाही का प्रतिवेदन एक माह में मांगा है।

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