थाने में अब खामोशी भी बोलेगी, पुलिस इशारों को समझेगी
न्याय की नई जुबान: हाथों के इशारे, इंसाफ की आवाज़
बेजुबानों की जुबान अब पुलिस की समझ में
पुलिस और जनता के बीच संवाद का रिश्ता अक्सर सवालों के घेरे में खड़ा होता है। लेकिन सोचिए, जब जनता का एक हिस्सा .. मूक और बधिर .. अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंचे और पुलिस उन्हें समझ ही न पाए, तो यह रिश्ता कितना अधूरा रह जाएगा। यही अधूरापन तोड़ने की कोशिश हुई है जबलपुर में, जहां पुलिस ने अपने लिए एक नई भाषा सीखी है…..सांकेतिक भाषा।
23 सितम्बर, अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस पर जबलपुर पुलिस ने यह ऐलान किया कि अब थाने का दरवाज़ा सिर्फ सुनने-सुनाने वालों तक सीमित नहीं रहेगा। अब वहां हाथों की हरकतें भी जुबान बनेंगी और बेजुबानों की शिकायतें सीधे कानून तक पहुंचेंगी। पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय की मौजूदगी में “सक्षम ऑर्गनाइजेशन” ने पुलिस कर्मियों को सांकेतिक भाषा का बेसिक प्रशिक्षण दिया। इशारों से संवाद करने की इस पहल ने पुलिस की छवि में एक संवेदनशीलता का नया रंग भर दिया है।
इस मौके पर Deaf शासकीय स्कूल के प्रिंसिपल शिवशंकर कपूर, महाकौशल बधिर संघ के अध्यक्ष संजय सोनी, सचिव प्रमोद नायर और संस्था के अक्षय सोनी भी मौजूद थे। पुलिस अफसरों की कतार में एएसपी सूर्यकांत शर्मा, डीएसपी आकांक्षा उपाध्याय, सीएसपी राजेश्वरी कौरव और सतीष कुमार साहू के साथ 25 पुलिसकर्मी इस प्रयोग का हिस्सा बने।

पुलिस कप्तान सम्पत उपाध्याय ने साफ कहा .. “न्याय हर नागरिक का अधिकार है। पुलिस का मकसद है कि समाज का कोई भी तबका, चाहे उसकी भाषा अलग क्यों न हो, न्याय से वंचित न रह जाए।”
यह पहल केवल एक औपचारिक प्रशिक्षण भर नहीं है। मूक-बधिरों के लिए यह उम्मीद की खिड़की है। अब अगर कोई पीड़ित थाने पहुंचेगा और उसकी आवाज़ शब्दों में नहीं बल्कि इशारों में होगी, तो पुलिस न सिर्फ समझेगी बल्कि कार्रवाई भी करेगी। प्रशिक्षित कर्मियों को जिले के हर थाने में भेजा जाएगा ताकि शिकायत दर्ज करने से लेकर जांच-पड़ताल तक, संवाद की खाई न रहे।

दरअसल, न्याय का रास्ता सिर्फ अदालतों से नहीं गुजरता, वह संवाद से होकर भी जाता है। और जब संवाद इशारों में हो, तो उसे समझने की जिम्मेदारी सबसे पहले राज्य की मशीनरी की होती है। जबलपुर पुलिस ने इस जिम्मेदारी की ओर पहला कदम बढ़ा दिया है। यह पहल शायद छोटी दिखे, लेकिन इसका असर बड़ा होगा…..क्योंकि अब थाने की खामोशी में भी न्याय की आवाज़ गूंजेगी।
रिपोर्ट आरती लोधी
