शेयर बाजार में हालिया सुस्ती के बावजूद, भारत का आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) बाजार जबरदस्त तेजी बनाए हुए है, जो ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है। इस वर्ष (2025 में) अब तक 100 से अधिक आईपीओ लॉन्च किए जा चुके हैं, जो 2007 के बाद सबसे बड़ी संख्या है।
मुख्य आंकड़े और रुझान: वर्ष 2007 के बाद इस साल आए 101 IPO
ऐतिहासिक संख्या:
इस साल मुख्य बोर्ड में कुल 101 आईपीओ आ चुके हैं। इससे पहले वर्ष 2007 में 108 आईपीओ आए थे, जो अब तक का रिकॉर्ड है।
इन आईपीओ के जरिए कंपनियों ने बाजार से करीब 90,000 करोड़ रुपये जुटाए हैं।
SIP का योगदान:
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, शेयर बाजार में व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) के माध्यम से खुदरा निवेशकों के निरंतर प्रवाह ने बाजार की तरलता (liquidity) बनाए रखी है, जिससे आईपीओ बाजार को समर्थन मिला है।
एसएमई की भूमिका: मुख्य बोर्ड के साथ-साथ, छोटे और मध्यम उद्यमों (SME) के लिए भी आईपीओ बाजार काफी सक्रिय रहा है।
यह डेटा दर्शाता है कि निवेशक, विशेष रूप से खुदरा निवेशक, नई लिस्टिंग के प्रति उत्साहित हैं और बाजार की व्यापक अस्थिरता के बावजूद गुणवत्तापूर्ण कंपनियों में निवेश करने के इच्छुक हैं।
2025 में आईपीओ बाजार के मुख्य बिंदु
- ऐतिहासिक संख्या: इस वर्ष मुख्य बोर्ड में आए 101 आईपीओ की संख्या 2007 के रिकॉर्ड 108 आईपीओ के आंकड़े के करीब पहुंच गई है।
- रिकॉर्ड फंडरेजिंग: 2025 में आईपीओ के माध्यम से जुटाई गई कुल पूंजी ₹1.77 लाख करोड़ ($19.6 बिलियन) एक नया सर्वकालिक उच्च स्तर है, जो 2024 के कुल संग्रह को पार कर गया है।
- प्रदर्शन में अंतर: रिकॉर्ड संख्या में लिस्टिंग के बावजूद, प्रदर्शन मिलाजुला रहा है। 2025 में सूचीबद्ध लगभग आधे शेयर अपने निर्गम मूल्य (offer price) से नीचे कारोबार कर रहे हैं, हालांकि कुछ अपवादों ने मजबूत शुरुआत की।
- एसएमई (SME) बाजार: छोटे और मध्यम उद्यमों का आईपीओ बाजार भी बेहद सक्रिय रहा है, जिसने 2025 में सितंबर तक लगभग ₹9,165 करोड़ जुटाए, जो इस सेगमेंट के लिए अब तक का सबसे अधिक वार्षिक फंडरेज़िंग है。
- घरेलू तरलता: विश्लेषकों का मानना है कि घरेलू निवेशकों से व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) के माध्यम से निरंतर प्रवाह ने बाजार में पर्याप्त तरलता बनाए रखी है, जिससे इस आईपीओ बूम को बढ़ावा मिला है।
