चौथे दिन भी गरजा मोहगांव जनपद सदस्य बोधसिंह मरकाम के धरने को मिला जन सैलाब का समर्थन

रेवांचल टाइम्स मोहगांव मंडला जनपद पंचायत मोहगांव के क्षेत्र क्रमांक 8 से जनपद सदस्य बोध सिंह मरकाम द्वारा क्षेत्रीय विकास की लंबित मांगों को लेकर किया जा रहा अनिश्चितकालीन धरना चौथे दिन और अधिक व्यापक रूप लेता नजर आया। विकासखंड मोहगांव के अंतर्गत विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु विगत वर्षों में कई बार पत्राचार और आवेदन दिए जाने के बावजूद ठोस कार्रवाई न होने से आक्रोशित जनप्रतिनिधि और ग्रामीण अब सड़क पर उतर आए हैं।

चौथे दिन आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण अंचलों से लोग पहुंचे। सुबह से ही धरना स्थल पर महिलाओं, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों की भीड़ उमड़ने लगी, जिससे पूरा वातावरण जनआंदोलन में तब्दील होता दिखा। समर्थन में नारेबाजी की गई और प्रशासन के प्रति नाराजगी खुलकर सामने आई।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वर्षों से क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर मांग की जा रही है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस पहल नहीं हुई है।धरने का नेतृत्व कर रहे जनपद सदस्य बोध सिंह मरकाम ने स्पष्ट कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के समग्र विकास के लिए किया जा रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार ज्ञापन और आवेदन देने के बावजूद समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक प्रशासन की ओर से लिखित आश्वासन और समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत नहीं की जाती, तब तक धरना जारी रहेगा।

प्रमुख मांगें धरने के माध्यम से जिन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया है, उनमें क्षेत्र के स्कूलों की जर्जर और खस्ताहाल भवनों का शीघ्र पुनर्निर्माण शामिल है। ग्रामीणों का कहना है कि कई विद्यालयों की स्थिति ऐसी है कि बच्चों की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। बरसात के मौसम में कक्षाओं में पानी भर जाता है और पठन-पाठन प्रभावित होता है।

इसके अतिरिक्त मोहगांव में कृषि महाविद्यालय की स्थापना की मांग भी प्रमुख है। युवाओं का कहना है कि कृषि प्रधान क्षेत्र होने के बावजूद उच्च कृषि शिक्षा के लिए उन्हें अन्य जिलों या शहरों में जाना पड़ता है, जिससे आर्थिक बोझ बढ़ता है।

स्थानीय स्तर पर महाविद्यालय खुलने से न केवल शिक्षा के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि कृषि क्षेत्र में नवीन तकनीकों का भी प्रसार होगा।किसानों की सुविधा के लिए कृषि मंडी की स्थापना की मांग भी जोर पकड़ रही है। वर्तमान में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर-दराज के बाजारों में जाना पड़ता है, जिससे परिवहन लागत बढ़ती है और उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इसी प्रकार सब्जी उत्पादकों के लिए व्यवस्थित सब्जी मंडी के निर्माण की मांग की गई है, ताकि स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार मिल सके।ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की समस्याएं भी आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कई गांवों में सड़कें जर्जर हैं, पेयजल संकट बना रहता है और विद्युत आपूर्ति अनियमित है। इन समस्याओं के स्थायी समाधान की मांग को लेकर लोगों में व्यापक असंतोष है।वरिष्ठजनों और युवाओं का समर्थनधरना स्थल पर पहुंचे वरिष्ठ नागरिकों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि समय रहते मांगों पर ध्यान दिया जाता तो जनता को आंदोलन का रास्ता नहीं अपनाना पड़ता।

उनका कहना है कि क्षेत्र के विकास से जुड़े मुद्दों को नजरअंदाज करना लोकतांत्रिक भावना के विपरीत है।युवाओं ने भी आंदोलन को सक्रिय समर्थन दिया। उन्होंने कृषि महाविद्यालय की स्थापना और रोजगार के अवसर सृजित करने की मांग को प्रमुखता से उठाया। युवाओं का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध नहीं होंगे, तो पलायन बढ़ेगा और क्षेत्र का समग्र विकास बाधित होगा।

धरने के लगातार चौथे दिन बढ़ते जनसमर्थन ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।

फिलहाल प्रशासन की ओर से औपचारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा की जा रही है।अब सबकी निगाहें प्रशासनिक अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे जनभावनाओं को समझते हुए क्षेत्र की लंबित मांगों पर कब ठोस निर्णय लेते हैं।

मोहगांव में उठी यह आवाज फिलहाल थमने के संकेत नहीं दे रही है और आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा प्रशासनिक रुख पर निर्भर करेगी।

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