कटनी से पवई-सलेहा की ओर आचार्यश्री विशुद्ध सागर जी का मंगल विहार, 3 मार्च को श्रेयांशगिरि में महा मस्तिकाभिषेक

रेवांचल टाइम्स संवाददाता, उमाकांत त्रिपाठी (पन्ना)

समाधि सम्राट गणाचार्य 108 श्री विरागसागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, पट्टाचार्य 108 विशुद्धसागर जी महाराज ससंघ का छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार से प्रारंभ हुआ पैदल मंगल विहार अब मध्यप्रदेश के कटनी होते हुए पवई-सलेहा की ओर अग्रसर है।

आचार्यश्री 19 फरवरी 2026 को कटनी पहुंचे और आहारचर्या के पश्चात दोपहर 2:40 बजे पवई के लिए विहार किया। वे प्रतिदिन 40–45 किलोमीटर पदयात्रा करते हुए 23 फरवरी तक सलेहा में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा एवं गजरथ महोत्सव में पहुंचेंगे।

यह विहार केवल यात्रा नहीं, बल्कि आत्मजागरण का संदेश है। जहां-जहां आचार्यश्री के चरण पड़ रहे हैं, वहां धर्मभाव, संयम और सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण निर्मित हो रहा है। 1991 में श्रेयांशगिरि में दीक्षा ग्रहण करने वाले आचार्यश्री कठोर तप-साधना और त्यागमय जीवन के लिए विख्यात हैं।

2 मार्च को सलेहा से विहार कर वे श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र श्रेयांशगिरि पहुंचेंगे, जहां 3 मार्च 2026 को प्रातः 8 बजे बड़े बाबा आदिनाथ भगवान के महा मस्तिकाभिषेक उनके सानिध्य में संपन्न होगा।

Share This Article
Translate »