राशि के इंतजार में अधूरे पड़े मकान, प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रहा आक्रोश
दैनिक रेवांचल टाइम्स – मंडला।
गरीबों को पक्का मकान देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना मंडला जिले में अब लापरवाही और अव्यवस्था की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। सरकारी कागजों में योजनाएं पूरी बताई जा रही हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
कई गांवों में आवास अधूरे पड़े हैं और हितग्राही आज भी अपनी छत के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि योजना की किस्त समय पर जारी नहीं होने के कारण निर्माण कार्य बीच में ही रुक गया है।
कई हितग्राही मजबूरी में कर्ज लेकर काम शुरू करते हैं, लेकिन पैसा नहीं मिलने से मकान अधूरे रह जाते हैं और वे कर्ज के बोझ तले दबते जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार मंडला जिले की जनपद पंचायत नैनपुर की कई ग्राम पंचायतों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब बताई जा रही है।
यहां पुराने स्वीकृत आवास आज तक पूरे नहीं हो पाए हैं और नए आवासों की स्वीकृति भी महीनों से लंबित पड़ी है। सवाल यह उठ रहा है कि जब शासन स्तर पर योजना के लिए बजट और दिशा-निर्देश जारी हैं, तो आखिर मंडला जिले में ही योजना क्यों दम तोड़ रही है?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या जिला प्रशासन को इन अधूरे मकानों और परेशान हितग्राहियों की स्थिति दिखाई नहीं दे रही, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं? अगर जमीनी स्तर पर जांच कराई जाए तो कई ग्राम पंचायतों में भारी लापरवाही और अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
जनता के सवाल
जब योजना का उद्देश्य गरीबों को पक्का मकान देना है, तो फिर आज भी अधूरे मकानों में लोग क्यों रह रहे हैं?
अगर पैसा जारी हुआ है तो हितग्राहियों तक समय पर क्यों नहीं पहुंच रहा?
आखिर जिला प्रशासन और जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या पर चुप क्यों हैं?
ग्रामीणों की मांग है कि जिला प्रशासन तत्काल इस पूरे मामले की जांच कराए, लंबित किस्तों का भुगतान सुनिश्चित करे और जिन पंचायतों में लापरवाही सामने आए वहां जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
अन्यथा योजनाएं केवल कागजों में पूरी और जमीन पर अधूरी ही नजर आती रहेंगी।
