मकर संक्रांति केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि धर्म, विज्ञान, संस्कृति और कृषि का संगम है। यह पर्व सकारात्मकता, नई शुरुआत और सामाजिक समरसता का संदेश देता है।
आज पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मकर संक्रांति का पर्व मनाया जा रहा है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही उत्तरायण काल की शुरुआत हो गई है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ माना जाता है।
देशभर में गंगा, यमुना और अन्य पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाई जा रही है। तिल-गुड़ का दान, खिचड़ी भोग और पतंग उत्सव से माहौल उत्सवमय है। मकर संक्रांति को नई फसल के आगमन और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक पर्व के रूप में देखा जाता है।
🌞 क्या है मकर संक्रांति?
मकर संक्रांति एकमात्र ऐसा भारतीय पर्व है, जो सौर पंचांग पर आधारित होता है। इस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण की ओर गमन करता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार उत्तरायण को देवताओं का दिन कहा गया है।
भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख पर्वों में मकर संक्रांति का विशेष स्थान है। यह पर्व हर वर्ष 14 या 15 जनवरी को मनाया जाता है और सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करने का प्रतीक है। इसी दिन से सूर्य उत्तरायण होता है, जिसे शुभ समय की शुरुआत माना जाता है।
🕉️ धार्मिक महत्व
- मकर संक्रांति के दिन गंगा स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है।
- तिल, गुड़, खिचड़ी, चावल और वस्त्रों का दान पुण्यकारी माना जाता है।
- मान्यता है कि इस दिन किया गया दान अक्षय फल देता है।
- प्रयागराज, हरिद्वार और गंगासागर में लाखों श्रद्धालु पवित्र स्नान करते हैं।
🪁 सांस्कृतिक महत्व
- देश के अलग-अलग हिस्सों में यह पर्व अलग नामों से मनाया जाता है—
- पोंगल (तमिलनाडु)
- उत्तरायण (गुजरात – पतंग उत्सव)
- माघ बिहू (असम)
- खिचड़ी पर्व (उत्तर प्रदेश, बिहार)
- इस दिन पतंग उड़ाने की परंपरा भी खास है, जो उमंग और उत्साह का प्रतीक है।
🔬 वैज्ञानिक महत्व
- सूर्य के उत्तरायण होने से दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं।
- यह परिवर्तन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है।
- सर्दियों के बाद शरीर को ऊर्जा देने के लिए तिल और गुड़ जैसे पोषक तत्वों का सेवन किया जाता है।
🌾 कृषि से जुड़ा पर्व
- मकर संक्रांति नई फसल के स्वागत का पर्व है।
- किसान इस दिन अपनी मेहनत का उत्सव मनाते हैं और ईश्वर को धन्यवाद देते हैं।
