छतरपुर (राजेश चौरसिया): बागेश्वर धाम गढ़ा में नवरात्रि साधना के समापन पर एक बड़ा फैसला लिया गया है। साधना के दौरान बागेश्वर महाराज के गुरु संन्यासी बाबा ने आदेश दिया कि बागेश्वर धाम में आने वाले वीआईपी और वीवीआईपी दर्शनार्थियों को अब दर्शन की अनुमति नहीं होगी। महाराज जी केवल उन्हीं भक्तों से मिलेंगे जो सच्चे भक्त के रूप में बिना किसी सिफारिश के दर्शन और आशीर्वाद लेने धाम में आते हैं।
नौ दिवसीय नवरात्रि साधना के समापन के बाद, बागेश्वर महाराज ने दसवें दिन बुंदेलखंड की गंगा कही जाने वाली केन नदी पर पहुँचकर अपना व्रत समाप्त किया। इस अवसर पर वाराणसी से आए आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ व्रत का समापन किया।
इसके बाद, महाराज जी ने धाम में आयोजित दिव्य दरबार में भक्तों के साथ अपनी साधना के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि ध्यान के दौरान उन्होंने पंचमुखी हनुमान का 11 लाख बार जाप किया और माता रानी की आराधना की तथा स्वयं को अपने आराध्य बागेश्वर बालाजी के चरणों में समर्पित कर दिया।
महाराज ने भक्तों को बताया कि ध्यान के दौरान उनके गुरु, संन्यासी बाबा ने उन्हें फटकार लगाते हुए कहा कि वीआईपी और वीवीआईपी बैठकों के कारण, गरीब, असहाय और दूर-दूर से धाम पहुँचने वाले भक्तों की पीड़ा अनसुनी हो जाती है। ये भक्त निराश होकर लौट जाते हैं। गुरु ने आदेश दिया कि अब से बागेश्वर धाम में प्रोटोकॉल और सिफ़ारिश वाले वीआईपी और वीवीआईपी को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। अगर वे आते भी हैं, तो उन्हें अलग से समय दिया जाएगा, लेकिन गरीब, असहाय, बीमार और सच्चे भक्तों को पहले अवसर मिलेगा।
महाराज जी ने कहा कि कुटिया में ध्यान के दौरान उन्होंने गुरुजी की आज्ञा का उल्लंघन न करने की प्रतिज्ञा की।
बागेश्वर महाराज ने कहा कि अब पहले की तरह बागेश्वर बालाजी की अनुमति से दिव्य दरबार में भक्तों की प्रार्थनाएँ सुनी जाएँगी और पर्चियाँ तैयार की जाएँगी। साथ ही, पहले की तरह, रोगियों के सायंकालीन दर्शन के दौरान भक्तों को सिद्ध अभिमंत्रित भभूति वितरित की जाएगी।
महाराज ने बताया कि यह प्रथा भविष्य में भी जारी रहेगी और प्रत्येक गुरुवार को नए नियमों के तहत, भक्तों से मिलकर मंदिर परिसर से सिद्ध भभूति वितरित की जाएगी।
