जबलपुर में अरबों की सौगात: फ्लाईओवर से टाइगर कॉरिडोर तक गडकरी की घोषणा

एँसबहेडिंग्स42 हज़ार करोड़ की सड़क परियोजनाएँ, पर्यटन और कनेक्टिविटी को नया पंख देने का दावा

लोकार्पण पर आतिशबाज़ी हुई रंगीन, लेकिन ज़मीनी सच्चाई अब भी अधूरी

जबलपुर।
शनिवार का दिन जबलपुर के नाम रहा। मंच पर राजनीतिक तामझाम था, लेकिन असली चर्चा उन सड़कों की थी, जिन पर आने वाले सालों में न सिर्फ गाड़ियाँ दौड़ेंगी बल्कि इलाके की अर्थव्यवस्था भी रफ्तार पकड़ेगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 4,250 करोड़ से अधिक की लागत वाली 9 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया।


मंच पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल, प्रहलाद सिंह पटेल, राकेश सिंह, संपतिया उइके, विष्णु दत्त शर्मा, आशीष दुबे, जनार्दन मिश्रा और सुमित्रा बाल्मीक समेत लगभग पूरा सियासी कुनबा मौजूद था। जबलपुर को विकास की नई राह देने का दावा करते नेताओं की तस्वीरें खिंच रही थीं और भीड़ तालियाँ बजा रही थी।


लोकार्पित योजनाओं में दमोह नाका से मेडिकल रोड तक 7 किमी का एलिवेटेड फ्लाईओवर, हिरन–सिंदूर खंड में नौरादेही वन्यजीव अभ्यारण्य के हिस्से का 4-लेन चौड़ीकरण और कटनी बाईपास का विस्तार प्रमुख हैं। इसके साथ ही छह अन्य राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं का शिलान्यास भी हुआ।


गडकरी का संदेश साफ था…..बेहतर कनेक्टिविटी ही विकास का सबसे बड़ा जरिया है। उन्होंने कहा कि इन सड़कों से न सिर्फ यातायात आसान होगा, बल्कि उद्योग, पर्यटन और रोज़गार के अवसरों को भी नया पंख मिलेगा।
मंच पर खड़े नितिन गडकरी ने संख्याओं का एक ऐसा पुलिंदा खोला, जिसे सुनकर जबलपुर से लेकर भोपाल-इंदौर तक विकास का नक्शा जैसे हवा में तैरने लगा।


केंद्रीय मंत्री ने 15,000 करोड़ की नई राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की घोषणा की। इनमें सबसे दिलचस्प है 5,500 करोड़ रुपए का ‘टायगर कॉरिडोर’, जो कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच के बीच 4-लेन कनेक्टिविटी देगा। मतलब, अब बाघों के दर्शन करने के लिए न सड़कें टेढ़ी-मेढ़ी होंगी और न सफर की थकान। पर्यटन को बढ़ावा और अर्थव्यवस्था को नई जान देने का दावा भी साथ ही जोड़ा गया।


गडकरी ने मंच से आगे गिनाना शुरू किया…..255 किमी लंबा भोपाल-जबलपुर ग्रीनफील्ड हाईवे (15,000 करोड़), लखनादौन से रायपुर 220 किमी हाईस्पीड कॉरिडोर (10,000 करोड़), इंदौर-भोपाल के लिए 107 किमी का मार्ग (12,000 करोड़) और 7,000 करोड़ से अधिक के अतिरिक्त प्रोजेक्ट। सुनने में यह सब किसी चुनावी मेनिफेस्टो जैसा लगा, फर्क बस इतना था कि यह सरकारी घोषणा पत्र था।


जबलपुर को भी ‘विशेष तोहफे’ मिले। सिविक सेंटर से मालवीय चौक और बड़ा फुहारा से बलदेव बाग तक 235 करोड़ का रोपवे, जिसकी डीपीआर बन रही है। साथ ही 309 करोड़ की लागत से हवाबाग कॉलेज से बंदरिया तिराहा, ग्रेनेडियर चौक से साईं बाबा मंदिर और शाह नाला तक नए फ्लाईओवर की सौगात भी घोषित हुई।


संक्षेप में कहें तो भाषण गडकरी का था, लेकिन उसके भीतर सड़कें, पुल, फ्लाईओवर और रोपवे ऐसे बिछे हुए थे मानो ‘विकास’ की एक आभासी तस्वीर जनता के सामने परोसी जा रही हो।


समारोह का समापन भी उतना ही भव्य था जितनी शुरुआत। मंच से लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “21वीं सदी भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर कायाकल्प का दशक है” वाले वाक्य को उद्धृत किया और उसे मध्यप्रदेश के वर्तमान दृश्य से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि गडकरी की दूरदृष्टि और मुख्यमंत्री मोहन यादव का “एकात्म भाव” मिलकर वह सक्सेस स्टोरी लिख रहे हैं, जिसमें लोक निर्माण का हर ईंट लोककल्याण में तब्दील हो रही है।


लेकिन यहाँ पर ज़रा ठहरिए। समारोह के बाद नेताओं ने नए फ्लाईओवर का निरीक्षण किया, और आतिशबाज़ी से आसमान रंगीन हो गया। दृश्य किसी राजनीतिक उत्सव से कम नहीं था…..जैसे सड़कें बन चुकी हों, ट्रैफिक खत्म हो चुका हो, और जनता की ज़िंदगी आसान हो गई हो।


यही वह जगह है जहाँ सवाल खड़ा होता है…..क्या यह चमकदार आतिशबाज़ी विकास की असली तस्वीर है, या फिर यह वही पुराना मंचन है जिसमें वादे ज़्यादा और ज़मीनी हकीकत कम होती है?
फ्लाईओवर का उद्घाटन तो हो गया, लेकिन बाकी घोषित अरबों-खरबों की परियोजनाएँ कब पूरी होंगी, कितनी गति से आगे बढ़ेंगी, और जनता तक इसका असल लाभ कब पहुँचेगा…..यही असली

कसौटी होगी।
रिपोर्ट आरती लोधी

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