नाईट शो यानी फुल नशा!जबलपुर में देर रात नशे का अड्डा बने ‘नाइट शो’ — नियमों की धज्जियां, प्रशासन बेखबर या मौन सहमति?
रेवांचल टाइम्स जबलपुर
शहर की सड़कों पर जब नींद पसरी होती है, तब जबलपुर के कुछ चुनिंदा इलाकों में ‘नाइट शो’ के नाम पर नशे, अश्लीलता और कानून की धज्जियां उड़ती हैं। देर रात तक चलने वाले इन शोज़ में नियम, कायदे और प्रशासनिक आदेशों को खुलेआम रौंदा जा रहा है। गोरा बाजार, बिलहरी रोड और मंडला रोड के आसपास के कई होटलों, कैफे और रेस्टोरेंट्स में यह सिलसिला तेज़ी से बढ़ रहा है — और सवाल खड़ा करता है कि क्या प्रशासन की आंखें बंद हैं या आंख मूंद ली गई हैं?
ड्रग्स, डांस और देर रात की रेव पार्टी
इन आयोजनों में खुलेआम मादक पदार्थों का सेवन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार महंगे ड्रग्स जैसे कोकिन, एलएसडी, चरस और गांजा तक की सप्लाई हो रही है। शराब परोसने के नाम पर हर वो प्रतिबंधित ड्रिंक पेश की जाती है, जो कानून के खिलाफ है। चौंकाने वाली बात ये है कि इन पार्टियों में नाबालिग और कॉलेज स्टूडेंट्स भी भारी संख्या में शामिल हो रहे हैं — जिन्हें बहकाना अब ट्रेंड बन चुका है।

100 की क्षमता, 500 की भीड़ — सुरक्षा और अग्निनियमों की अनदेखी
नियमों के अनुसार, किसी भी आयोजन स्थल पर फायर सेफ्टी, अधिकतम क्षमता, पार्किंग व समय-सीमा तय होती है। लेकिन इन आयोजनों में 100 लोगों की क्षमता वाले हॉल में 400-500 लोगों को घुसाकर रेव पार्टी करवाई जा रही है। न फायर सेफ्टी, न एंबुलेंस की सुविधा — अगर हादसा हो गया तो कौन जिम्मेदार होगा?
अवैध पार्किंग बनी जानलेवा समस्या
इन आयोजनों के कारण रातभर रोड किनारे गाड़ियां अंधाधुंध खड़ी रहती हैं। इससे ट्रैफिक बाधित होता है, और कई बार एम्बुलेंस तक का रास्ता रुक जाता है।
प्रशासनिक चुप्पी: सवालों के घेरे में
यह सवाल उठाना जरूरी है कि इतने खुलेआम आयोजन हो रहे हैं, तो क्या नगर निगम, पुलिस, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन को इसकी जानकारी नहीं? या फिर हर टिकट, हर रेव पार्टी और हर बोतल के पीछे कोई ‘अदृश्य संरक्षण’ काम कर रहा है?
क्या इन्हें राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त है? क्या कुछ अफसर इस खेल में हिस्सेदार हैं?
नियम क्या कहते हैं?
- MP आबकारी अधिनियम 1915 के अनुसार सार्वजनिक स्थलों पर अवैध शराब परोसना दंडनीय अपराध है।
- NDPS Act 1985 के तहत ड्रग्स का सेवन, सप्लाई और खरीदी-बिक्री गंभीर अपराध है, जिसमें सख्त सजा का प्रावधान है।
- Noise Pollution Rules 2000 के तहत रात 10 बजे के बाद डीजे, लाउडस्पीकर और नाइट शो प्रतिबंधित हैं।
- FSSAI & Fire Safety Norms के तहत किसी भी होटल में तय क्षमता से अधिक भीड़ और बिना सुरक्षा मंजूरी कार्यक्रम प्रतिबंधित हैं।
- IPC की धारा 268, 283, 336, 269, 270 के तहत यदि सार्वजनिक स्थान पर भीड़ से जान-माल का खतरा उत्पन्न होता है, तो आयोजक और संचालक दंडनीय हैं। आखिर क्यों मौन है शासन?
क्या शासन-प्रशासन को रिपोर्ट नहीं की जा रही?
अगर रिपोर्ट हो रही है, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
आयोजनों की सूचना सोशल मीडिया पर प्रचारित होती है, टिकट खुलेआम बेचे जाते हैं — क्या प्रशासन को यह नहीं दिखता?
क्या इन आयोजनों को मिलने वाली अनुमति की प्रक्रिया जांच के योग्य नहीं है?
जबलपुर की युवा पीढ़ी को गर्त में ले जाने वाले इस ‘नाइट शो कल्चर’ पर अब रोक जरूरी है। वरना आने वाले समय में यह केवल नशाखोरी और अपराध का केंद्र बन जाएगा। शासन की चुप्पी कहीं जनहित की हत्या ना बन जाए।
