जबलपुर के सीएमएचओ डॉ. संजय मिश्रा पर अनुशासनात्मक कार्यवाही तय

kaonebroadcast@gmail.com
4 Min Read

निजी लैब में हिस्सेदारी, फर्जी दस्तावेज, दो विवाह, बेनामी संपत्ति सहित 5 गंभीर आरोपों पर विभागीय जांच शुरू

शासन ने जारी किया आरोप पत्र, 45 दिन में मांगा जवाब

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर
संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, मध्यप्रदेश द्वारा डॉ. संजय मिश्रा, प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जबलपुर के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही हेतु आरोप पत्र जारी किया गया है। यह कार्यवाही म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम के तहत प्रारंभ की गई है।

शिकायतकर्ता नरेंद्र कुमार राकेशिया के आधार पर आरोप पत्र तैयार किया गया, जिसकी एक प्रति लोकायुक्त कार्यालय को भी प्रेषित की गई है।

ये हैं डॉ. मिश्रा पर लगे प्रमुख आरोप:

  1. निजी लैब में हिस्सेदारी

एप्पल, फेथ, दिव्यता व परफेक्ट इंडोकेयर नामक लैबों से जुड़ाव।

स्वयं दिए गए कथनों में डॉ. मिश्रा ने इन लैबों के संचालन की बात स्वीकार की।

यह शासकीय सेवक के लिए स्पष्ट नियम उल्लंघन है।

  1. दो विवाह करना

पहली पत्नी तृप्ति मिश्रा के जीवित रहते हुए इशिप्ता सिंह मिश्रा से विवाह।

यह आचरण म.प्र. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 22 का उल्लंघन है।

  1. सेवा पुस्तिका में फर्जी पन्नों की मिलावट

आठ फर्जी पृष्ठ जोड़कर तृप्ति मिश्रा को पत्नी के रूप में दर्शाया गया।

यह गंभीर दस्तावेजी हेरफेर है, जो अपराध की श्रेणी में आता है।

  1. बिना अनुमति अचल संपत्ति की खरीदी

इशिप्ता सिंह के साथ मिलकर रामपुर, जबलपुर में फ्लैट खरीदा गया।

शासन की अनुमति नहीं ली गई, जो सिविल सेवा नियमों का उल्लंघन है।

  1. अवैध रूप से नियुक्ति

चयन 1990 में हुआ, लेकिन 7 साल बाद पदभार ग्रहण किया।

कोई वैध दस्तावेज या अनुमति शासन के समक्ष प्रस्तुत नहीं की गई।

कोषालय सॉफ्टवेयर (IFMIS) में अवैध नाम परिवर्तन

डॉ. मिश्रा पर आरोप है कि उन्होंने बिना सक्षम स्वीकृति के IFMIS सिस्टम में पत्नी के नाम में परिवर्तन कर गंभीर प्रशासनिक अनियमितता की। नियमों के अनुसार ऐसा परिवर्तन पूर्व सूचना व अनुमोदन के बाद ही किया जा सकता है।

लोकायुक्त प्रकरण से उठी कार्रवाई की लपट

डॉ. मिश्रा के खिलाफ लोकायुक्त प्रकरण क्रमांक 91/ई/2024 में भी जांच लंबित है। इसी संदर्भ में शासकीय उपमहाधिवक्ता द्वारा न्यायालय को पूरी जानकारी न देने के कारण एक याचिका रद्द कर दी गई और ₹50,000 का जुर्माना लगाया गया।

शिकायतकर्ता बनेंगे सरकारी गवाह

शिकायतकर्ता नरेंद्र राकेशिया को सरकारी गवाहों की सूची में शामिल किया गया है। इससे स्पष्ट है कि शासन ने प्रारंभिक स्तर पर ही शिकायत को विश्वसनीय माना है।

जवाबों में उलझे डॉ. मिश्रा, खुद साबित किए दोषी

डॉ. मिश्रा द्वारा प्रस्तुत उत्तरों में विरोधाभास और अस्पष्टता सामने आई। जांच समिति ने माना कि डॉ. मिश्रा के उत्तरों ने ही आरोपों को प्रमाणित कर दिया है। यही कारण है कि अब अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई है।

बड़ा चेहरा, गंभीर आरोप, कड़ा संदेश

स्वास्थ्य विभाग जैसे जिम्मेदार महकमे में शीर्ष पद पर बैठे अधिकारी पर इस प्रकार के संगीन आरोप निश्चित रूप से गंभीर चिंता का विषय हैं। शासन द्वारा की गई कार्रवाई आने वाले समय में अन्य अधिकारियों के लिए कड़ा संदेश बन सकती है।

👁️ 0 views Views
Share This Article
Translate »