मरे हुए सिग्नलों पर घुट रहा ट्रैफिक का दम सिग्नल बंद, सिस्टम बंद – जनता भगवान भरोसे बारिश में ठप यातायात व्यवस्था, जनता बेहाल, अधिकारी लापता
भरी बारिश में जबलपुर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई है। मरे हुए सिग्नलों पर ट्रैफिक व्यवस्था का दम घुट रहा है। करोड़ों रुपए आईटीएमएस सिस्टम पर खर्च करने के बावजूद शहर के लगभग सभी मुख्य सिग्नल बंद पड़े हैं, जिससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। चौराहों पर न ट्रैफिक लाइट काम कर रही है, न कोई ट्रैफिक पुलिसकर्मी मौजूद है। नतीजा—जगह-जगह जाम, अराजकता और हादसों की बाढ़।

सड़कें बनी जानलेवा: टू-व्हीलर, साइकिल सवार सबसे ज्यादा शिकार
सिग्नल बंद होने के कारण चौराहों पर वाहन इधर-उधर से निकलते हैं, जिससे मार्गों पर अव्यवस्था फैल जाती है। विशेष रूप से दोपहिया और साइकिल सवारों को सबसे अधिक खतरा है। बारिश में फिसलन, कीचड़ और जलभराव के साथ-साथ सिग्नल विफलता ने मिलकर हालात को और भी भयावह बना दिया है।

ट्रैफिक जवान कहां हैं? — ‘छाते के नीचे आराम, मैदान में शून्य’
शहर के नागरिकों का आरोप है कि बारिश होते ही यातायात सिपाही चौराहों से गायब हो जाते हैं, या फिर किसी कोने में छाता लगाकर मोबाइल में व्यस्त नजर आते हैं।
ट्रैफिक कंट्रोल के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं दिख रही। न सिग्नल ठीक किए जा रहे हैं, न मैनुअल कंट्रोल किया जा रहा है

सीवर खुदाई अधूरी, सड़कों पर गड्ढे, सुरक्षा इंतजाम शून्य
शहर के अधिकांश इलाकों में सीवर लाइन और डिवाइडर निर्माण का कार्य अधूरा पड़ा है। इन जगहों पर गड्ढे तो हैं, लेकिन—
कोई बैरिकेडिंग नहीं….
कोई चेतावनी बोर्ड नहीं…
कोई रात में रिफ्लेक्टर या लाइट नहीं….
यह हालात सीधे तौर पर दुर्घटनाओं को न्योता दे रहे हैं।
कहां है प्रशासन, कहां हैं नेता?
स्थानीय नागरिकों का यह भी कहना है कि—
न तो यातायात विभाग दिखता है,
न नगर निगम का अमला,
और न ही कोई स्थानीय जनप्रतिनिधि।
हर ओर बस जनता परेशान है, जबकि जिम्मेदार तंत्र नदारद है।…
‘चालान के लिए खड़े हैं, सुधार के लिए नहीं’
लोगों में इस बात को लेकर भी आक्रोश है कि जहां हेलमेट या कागजों की जांच करनी हो, वहां पुलिस कर्मी कतार में खड़े मिलते हैं। लेकिन जहां दुर्घटनाएं रोकनी हों, वहां कोई नजर नहीं आता।
ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ट्रैफिक पुलिस का काम सिर्फ चालान करना रह गया है?

जनता की मांग : हो त्वरित कार्रवाई, बहाल हो ट्रैफिक सिस्टम
नागरिकों ने निम्न मांगें प्रशासन के समक्ष रखी हैं:.
सभी सिग्नलों की मरम्मत और संचालन तुरंत हो
चौराहों पर मानव बल से ट्रैफिक कंट्रोल किया जाए
अधूरी खुदाई और गड्ढों को सुरक्षित और चिह्नित किया जाए
जलभराव वाले इलाकों में तत्काल नाली व्यवस्था बनाई जाए
ट्रैफिक स्टाफ को सक्रिय निगरानी में तैनात किया जाए
बारिश का बहाना कब तक?
जबलपुर जैसे बढ़ते हुए शहर में बारिश को बहाना बनाकर ट्रैफिक व्यवस्था से हाथ खींच लेना अब स्वीकार्य नहीं है।
प्रशासन और नेताओं की चुप्पी अब जनता की जान पर भारी पड़ रही है। क्या अब भी कोई बड़ा हादसा होगा, तब जाकर कोई जागेगा?
