दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला, जिला जेल अभिरक्षा या मौत का अड्डा मंडला में फिर एक सिविल बंदी की इलाज के दौरान हुई मौत होने की जानकारी निकलकर सामने आ रही है जहाँ जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि जेल में रह रहे अभिरक्षा लोगो को न तो समय पर उचित उपचार मिलता और न ही बंदियों को समय समय में शासन से मिलने वाली सुविधाओं से वंचित रख कर एंव गुणवत्ता हीन वस्तुएं भोजन एवं दवाइयों की पर्याप्त व्यवस्था नही की गई, लापरवाही के चलते उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः मौत हो गई।
वही परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते आनंद चक्रवर्ती को समय रहते सही ईलाज व्यवस्था और भोजन व्यवस्था आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जातीं तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। परिजनों ने जेल प्रबंधन पर पूरी पूरी जिम्मेदारी व लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
सूत्रों के अनुसार जिला जेल में मंडला जिला जेल में बंद एक सिविल बंदी की उपचार के दौरान जिला अस्पताल में मौत हो गई मृतक की पहचान 48 वर्षीय आनंद चक्रवर्ती के रूप में हुई है, जो सिवनी जिले के केवलारी थाना क्षेत्र के ग्राम साठई का निवासी था और वह भरण-पोषण के एक मामले में 11 महीने की सजा काट रहा था, मृतक की मौत का जिम्मेदार परिजनों ने जेल प्रशासन को ठहरा रहे है और जल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं…
उनका कहना है जब आनंद की तबीयत खराब थी तो उसे समय से इलाज क्यों नही दी गई दवाई क्यों नही कराई गई और न ही हमे कोई सूचना दी गई और जब अधिक बीमारी बढ़ने और ज्यादा सेहद बिगड़ने पर उसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया था, जहां इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। घटना के बाद परिजनों में आक्रोश व्याप्त है और उन्होंने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले ने जिला जेल में कैदियों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं और व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि परिजनों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं बल्कि जेल प्रशासन की गंभीर लापरवाही का मामला भी हो सकता है। और आखिर कब तक अभिरक्षा में हो रही मौत का सिलसिला चलता रहेगा ।
और आखिर कब तक सजा के पहले ही मौत की सजा जैल प्रबंधन सुनता रहेगा क्योंकि जेल अभिरक्षा में आनंद जैसे अनेको बेठे बाहर आने का इंतजार कर रहे है पर अब उन्हें यह चिंता सताने लगी है कि क्या हम समय रहते घर जाएंगे या फिर यहां से सीधे कही हो ले न जाये बस जेल अभिरक्षा में सुगबुगाहट जारी है कि जहाँ अपराध करने वालो को अपराधी सिद्ध होने तक वह सही सलामत रह सकते है या फिर नही बड़ा चिंता का विषय नजर आ रहा और अब अनेको सवाल जेल प्रबंधन को लेकर खड़े हो रहे हैं।
वही परिजनों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए तथा यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले की जांच की बात कही जा रही है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर सिविल बंदी की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है और क्या परिजनों को न्याय मिल पाएगा? या फिर वह केवल शुर्खियो तक ही सीमित रह जायेगी।
