
स्थानीय और जिला प्रशासन की मेहरबानी, नागरिक नाराज रजिस्ट्राऱ कर करे है धड़ाधड़ रस्जिट्री आखिर किनका बढ रहा है राजस्व
दैनिक रेवांचल टाइम्स मंडला। आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में कृषि भूमि और आदिवासी अंचल की जमीनों पर अवैध कॉलोनियों का जाल तेजी से फैल रहा है। बिना किसी वैधानिक अनुमति के प्लॉटिंग कर आम नागरिकों को पूर्ण सुविधाओं का झांसा देकर प्लॉट बेचे जा रहे हैं, जबकि न तो भूमि उपयोग परिवर्तन (डायवर्जन) हुआ है और न ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएंडसीपी) की स्वीकृति ली गई है। स्थानीय लोगों और सूत्रों का आरोप है कि प्रशासन की नाक के नीचे यह खेल चल रहा है और विभागीय मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।
जिले के प्रमुख इलाकों में यह अवैध निर्माण धड़ल्ले से जारी है। पाईप फैक्टी के आसपास, मेडिकल कॉलेज क्षेत्र, संगम के पास हेलीपेड कॉलोनी, कटरा के पीछे, सरदार पटेल कॉलेज लालीपुर सुभाष वार्ड क्षेत्र, आमानाला सबस्टेशन से पहले नर्मदा रोड, बिनैका टंकी के पास, एकता कॉलोनी, कौरगांव, बड़ी खैरी तालाब के आसपास, कम्पोस, राजीव कॉलोनी, पुरवा, महाराजपुर, इंडियन गार्डन, देवदरा, किले और जंतीपुर समेत दर्जनों जगहों पर बुलडोजर चलाकर खेतों और पड़त भूमि को समतल किया जा रहा है। डेवलपर्स आकर्षक नक्शे दिखाकर सड़क, बिजली, पानी और नाली जैसी सुविधाओं का लालच दे रहे हैं, लेकिन वास्तव में इन क्षेत्रों में कोई मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
रजिस्ट्रार उड़ा रहे है कानून की धज्जियां
मंडला नैनपुर रजिस्ट्रार बैठे बैठे केवल रजिस्ट्री धड़ाधड़ कर रहे है इन्हे सही गलत या नियम कानून और अनुमति की आवश्कता नहीं देखा जा रहा बस इन्हे रजिस्ट्री करनी है वही इनके द्वारा मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता, 1959 के तहत कृषि भूमि का बिना अनुमति उप-विभाजन और गैर-कृषि उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। टीएंडसीपी नियमों, पर्यावरणीय मानकों, अग्निशमन सुरक्षा और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमतियों के अभाव में ये कॉलोनियां पूरी तरह अवैध हैं। रजिस्ट्री, खसरा-खतौनी, जल-विद्युत आपूर्ति और सीवरेज जैसी बुनियादी स्वीकृतियां भी नदारद हैं। प्रस्तावित मध्य प्रदेश कॉलोनी एकीकृत अधिनियम–2026 के तहत ऐसे अवैध निर्माण पर 10 वर्ष तक की सजा, एक करोड़ रुपये तक का जुर्माना और 45 दिनों के अंदर कॉलोनी हटाने का प्रावधान है। जिम्मेदारी सीधे कलेक्टर स्तर तक तय की गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्रवाई न के बराबर है।
खरीदारों पर मंडराता खतरा
भूमि विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी अवैध कॉलोनियों में प्लॉट खरीदने वाले आम लोगों को भविष्य में भवन निर्माण अनुमति, बैंक लोन, बिजली-पानी कनेक्शन और संपत्ति पंजीयन में गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई पीड़ित परिवार पहले ही आर्थिक रूप से बर्बाद हो चुके हैं। यदि बाद में इन कॉलोनियों पर बुलडोजर चला तो सबसे बड़ा नुकसान खरीदारों को ही उठाना पड़ेगा।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है
जिलेभर में अवैध कॉलोनियों की व्यापक जांच कर छापेमारी की जाए
दोषी डेवलपर्स और संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो
प्रभावित खरीदारों को राहत और धन वापसी की व्यवस्था की जाए
भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी रखी जाए
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिला प्रशासन, राजस्व विभाग, टीएंडसीपी और नगर पालिका को पूरी जानकारी होने के बावजूद केवल प्रतीकात्मक कार्रवाई हो रही है। कई मामलों में अवैध निर्माण जारी हैं। नागरिकों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच हुई तो बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार उजागर हो सकता है।
