शाही नाका में दिनदहाड़े कत्ल: लेनदेन के विवाद में युवक पर ताबड़तोड़ चाकू वार, अस्पताल में टूटी सांसें

Revanchal
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सड़कों पर बहता खून, थानों में बहाने… जबलपुर आखिर किसके भरोसे?

दैनिक रेवांचल टाइम्स जबलपुर। जबलपुर में कानून व्यवस्था अब सवाल नहीं, भय का दूसरा नाम बनती जा रही है। शहर की सड़कों पर चाकू चल रहे हैं, बदमाश खुलेआम हत्या कर रहे हैं और पुलिस हर वारदात के बाद वही घिसा-पिटा वाक्य दोहराती नज़र आती है… आरोपी जल्द गिरफ्तार होंगे…।

लेकिन बड़ा सवाल यह है कि जब अपराधी दिनदहाड़े किसी युवक को सड़क पर मौत के घाट उतार रहे हों, तब पुलिस आखिर कर क्या रही है?
मंगलवार को संजीवनी नगर थाना क्षेत्र के शाही नाका इलाके में जो हुआ, उसने एक बार फिर साबित कर दिया कि जबलपुर में बदमाशों के भीतर कानून का डर लगभग खत्म हो चुका है। बीच सड़क पर युवक आयुष साहू पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमला किया गया। लोग देखते रहे, चीखें गूंजती रहीं और हमलावर खून से सनी सड़क छोड़कर फरार हो गए।


बताया जा रहा है कि आयुष साहू का पुराना लेनदेन को लेकर रोहन पटेल और आयुष श्रीपाल से विवाद चल रहा था। मंगलवार को यही विवाद खूनी अंजाम तक पहुंच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक पहले कहासुनी हुई, फिर अचानक चाकू निकले और देखते ही देखते शाही नाका की सड़कें रणभूमि में बदल गईं।


हमलावरों ने आयुष पर कई वार किए। जांघ पर लगा गहरा घाव उसकी जान ले गया। खून से लथपथ आयुष सड़क पर गिर पड़ा। आसपास मौजूद लोगों ने किसी तरह उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया, लेकिन अत्यधिक रक्तस्राव के कारण डॉक्टर उसे नहीं बचा सके।


सबसे भयावह बात यह है कि यह सब किसी सुनसान इलाके में नहीं, बल्कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्र में हुआ। इसका सीधा मतलब है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है। जब अपराधी खुलेआम चाकू लेकर घूम रहे हों और बीच सड़क पर हत्या कर भाग निकलें, तब यह केवल एक हत्या नहीं बल्कि शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर खुला तमाचा है।


घटना के बाद दोनों आरोपी फरार हो गए। पुलिस अब सीसीटीवी फुटेज खंगालने और दबिश देने की बात कर रही है। लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या पुलिस हमेशा अपराध होने के बाद ही सक्रिय होगी? क्या शहर में लगातार बढ़ रही चाकूबाजी, गैंगवार और सड़क पर होने वाली हिंसा को रोकने के लिए कोई ठोस रणनीति है भी या नहीं?


शाही नाका और आसपास के इलाकों में इस घटना के बाद दहशत का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जबलपुर में अपराध अब सामान्य खबर बनते जा रहे हैं। हर दूसरे दिन कहीं चाकूबाजी, कहीं गोलीबारी और कहीं बमबाजी की खबर सामने आ रही है। जनता के भीतर यह डर गहराने लगा है कि अगर दिनदहाड़े सड़क पर हत्या हो सकती है, तो आम आदमी आखिर सुरक्षित कहां है?


जबलपुर पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती केवल आरोपियों को पकड़ना नहीं, बल्कि शहर में खत्म होते कानून के भय को वापस लाना है। क्योंकि अगर अपराधियों के हौसले इसी तरह बुलंद रहे, तो आने वाले दिनों में शहर की सड़कों पर सिर्फ ट्रैफिक नहीं, खून भी बहता नजर आएगा।
मुहम्मद अनवार बाबू

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