
CCTV में कैद दबंगई और सड़क पर हत्या… जबलपुर की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर बड़े सवाल
तीन दिन में दूसरी हत्या
शिकायत की तो खत्म कर देंगे … जबलपुर में अपराधियों की खुली चुनौती, पुलिस पर सवाल
जबलपुर। शहर बदल रहा है। लेकिन सवाल यह है कि किस दिशा में?
क्या यह वही जबलपुर है जिसे कभी संस्कारधानी कहकर गर्व महसूस किया जाता था? या अब यह वह शहर बनता जा रहा है जहां घर के भीतर भी सुरक्षा की गारंटी नहीं और सड़क पर जिंदगी की कोई कीमत नहीं?
एक खबर भेड़ाघाट से आती है।
एक अधिवक्ता का घर। कानून जानने वाला आदमी। दस्तावेज पूरे। नामांतरण पूरा। फिर भी कुछ लोग आते हैं… घर में घुसते हैं… सामान बाहर फेंकते हैं… मारपीट करते हैं… धमकी देते हैं। और यह सब किसी अंधेरे कोने में नहीं होता। कैमरे के सामने होता है। CCTV में रिकॉर्ड होता है। जैसे अपराधियों को यकीन हो कि उन्हें कोई रोकने वाला नहीं है।
प्रज्ञा कॉलोनी में अधिवक्ता राजेश कुशवाहा का आरोप है कि दबंग उनके घर में घुसे, कूलर-फ्रिज से लेकर बर्तन तक बाहर फेंक दिए। छोटे भाई ने विरोध किया तो उसके साथ मारपीट हुई। और जब खुद अधिवक्ता मौके पर पहुंचे तो उन्हें कहा गया… पुलिस गए तो पूरे परिवार को खत्म कर देंगे…
ज़रा इस वाक्य को ध्यान से सुनिए।
यह सिर्फ एक धमकी नहीं है। यह उस मनोविज्ञान की तस्वीर है जिसमें अपराधी को कानून का डर नहीं बचा।
और फिर दूसरी खबर आती है गोहलपुर के समता कॉलोनी से।
20 साल का एक लड़का। भावेश वीरानी। उम्र इतनी कि जिंदगी अभी शुरू ही हुई थी। लेकिन देर रात कुछ लोग आते हैं। पुरानी रंजिश निकलती है। चाकू निकलते हैं। गले और हाथ पर वार होते हैं। सड़क पर खून बहता है। और थोड़ी देर बाद अस्पताल में डॉक्टर कहते हैं… अब यह नहीं रहा।
तीन दिन में दूसरी हत्या।
हर बार वही कहानी… पुरानी रंजिश… आरोपी फरार… टीमें गठित… जल्द गिरफ्तारी होगी…
लेकिन शहर पूछ रहा है कि आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं?
जबलपुर में अब अपराध सिर्फ पुलिस रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं रह गए हैं। वे लोगों की रोज़मर्रा की बातचीत का हिस्सा बन चुके हैं। माता-पिता बच्चों को देर रात बाहर भेजने से डरते हैं। लोग जमीन खरीदने से पहले दबंगों का नाम पूछते हैं। सड़क पर विवाद होने पर लोग बीच-बचाव करने से बचते हैं, क्योंकि अब चाकू निकलने में देर नहीं लगती।
सबसे खतरनाक चीज़ क्या है, जानते हैं?
अपराध का सामान्य हो जाना।
जब हत्या की खबर पढ़कर लोग चौंकना बंद कर दें…
जब घर में घुसकर कब्जे की कोशिश सिस्टम का हिस्सा लगने लगे…
जब हर वारदात के बाद जनता को सिर्फ जांच जारी है सुनाई दे…
तब समझ लीजिए कि समस्या सिर्फ अपराध नहीं, व्यवस्था की विश्वसनीयता की भी है।
पुलिस कार्रवाई कर रही है, मामले दर्ज हो रहे हैं, टीमें बनाई जा रही हैं। लेकिन सवाल कार्रवाई के बाद का नहीं, अपराध होने से पहले की रोकथाम का है। आखिर शहर में ऐसा माहौल क्यों बन रहा है जहां दबंग खुलेआम घरों में घुस रहे हैं और युवा सड़कों पर चाकुओं से मारे जा रहे हैं?
संस्कारधानी का मतलब सिर्फ सांस्कृतिक कार्यक्रम और बड़े-बड़े होर्डिंग नहीं होता।
संस्कारधानी वह शहर होता है जहां एक वकील अपने घर में सुरक्षित हो… और एक 20 साल का लड़का रात में जिंदा घर लौट सके।
मुहम्मद अनवार बाबू
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जबलपुर में बढ़ता अपराध, जनता में डर
🔹 भेड़ाघाट में अधिवक्ता के घर दबंगई
प्रज्ञा कॉलोनी में अधिवक्ता राजेश कुशवाहा के घर में घुसकर आरोपियों ने जमकर तोड़फोड़ की। घर का सामान बाहर फेंका गया और विरोध करने पर मारपीट व जान से मारने की धमकी दी गई। पूरी वारदात CCTV में कैद हुई है।
🔹 समता कॉलोनी में युवक की चाकुओं से हत्या
गोहलपुर क्षेत्र में 20 वर्षीय भावेश वीरानी की पुरानी रंजिश के चलते चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई। गले और हाथ पर ताबड़तोड़ वार किए गए। अस्पताल पहुंचने से पहले ही युवक ने दम तोड़ दिया।
🔹 तीन दिन में दूसरी हत्या से दहशत
लगातार बढ़ रही चाकूबाजी और हत्या की घटनाओं ने शहरवासियों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।
🔹 जनता पूछ रही बड़ा सवाल
क्या जबलपुर में अपराधियों के मन से पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है?
क्या संस्कारधानी अब अपराधधानी बनती जा रही है?
