
रेवांचल टाइम्स – मंडला जिले के विकासखंड नारायणगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत शाहा इन दिनों भ्रष्टाचार और शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर चर्चा का केंद्र बनी हुई है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन की खुली बंदरबांट की जा रही है और जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदकर सब कुछ देखते हुए भी मौन बने हुए हैं।
मामला मुख्यमंत्री अवसंरचना योजना अंतर्गत निर्मित ग्रेवल सड़क और उसके बाद पंचायत द्वारा उसी सड़क को तोड़कर नई पुलिया निर्माण से जुड़ा हुआ है, जिसने पूरे क्षेत्र में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
वही सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम शंकरगंज/तिलगांव टोला शाहा से सिंघनपुरी तक लगभग 2.7 किलोमीटर लंबी ग्रेवल सड़क का निर्माण मुख्यमंत्री अवसंरचना योजना के अंतर्गत कराया गया। इस सड़क निर्माण कार्य की लागत लगभग 147.66 लाख रुपये बताई गई है। कार्य की क्रियान्वयन एजेंसी कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकीय सेवा मंडला थी, जबकि निर्माण कार्य का जिम्मा गोटेगांव की श्री माँ कंस्ट्रक्शन कंपनी को सौंपा गया था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि निर्माण स्थल पर लगाए गए बोर्ड में कार्य पूर्णता की तिथि “30/2/2026” अंकित की गई है, जबकि फरवरी माह में 30 तारीख होती ही नहीं। इस एक गलती ने पूरे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब निर्माण कार्य से जुड़ी बुनियादी जानकारी तक सही नहीं लिखी जा सकी, तो यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि निर्माण कार्य कितनी गंभीरता और गुणवत्ता के साथ किया गया होगा।
आरोप है कि अधिकारी बिना मौके का निरीक्षण किए ही घर बैठे पूर्णता प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं। यही कारण है कि ठेकेदार मनमानी करते हैं और घटिया निर्माण कार्य को भी कागजों में उत्कृष्ट बताकर भुगतान निकाल लिया जाता है। सड़क निर्माण का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों को बारहमासी और सुरक्षित आवागमन की सुविधा देना होता है ताकि बरसात के दिनों में ग्रामीणों को कीचड़ और फिसलन से परेशान न होना पड़े।
लेकिन शाहा पंचायत में जो हो रहा है, उसने विकास योजनाओं की वास्तविकता उजागर कर दी है।बताया जा रहा है कि सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदार द्वारा दो आरसीसी पुलियों का निर्माण भी कराया गया था। सड़क तैयार हो चुकी थी और ग्रामीणों ने आवागमन भी शुरू कर दिया था। लेकिन अब ग्राम पंचायत ने एक पुलिया को तोड़कर नई पुलिया निर्माण की तैयारी की जा रही है पंचायत द्वारा सड़क को खुद ही क्षतिग्रस्त किए जाने से ग्रामीणों में आक्रोश है।
इस पूरे मामले में पंचायत के रोजगार सहायक गर्जन यादव का बयान भी कई सवाल खड़े करता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में इसी स्थान पर लगभग 8 लाख रुपये की लागत से पुलिया निर्माण के लिए जियो टैगिंग की गई थी। लेकिन वन विभाग से अनुमति नहीं मिलने के कारण उस समय पुलिया का निर्माण नहीं हो पाया। अब जबकि ठेकेदार द्वारा सड़क और पुलिया का निर्माण किया जा चुका है, पंचायत उसी सड़क को तोड़कर नया निर्माण की तैयारी कर रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि ठेकेदार पहले ही पुलिया बना चुका था, तो फिर पंचायत को दोबारा निर्माण की आवश्यकता क्यों पड़ी क्या सिर्फ इसलिए कि स्वीकृत राशि खर्च करनी थी लोगों का आरोप है कि पंचायत किसी भी तरह 8 लाख रुपये खर्च कर उसमें अपना “हिस्सा” निकालना चाहती है। यही कारण है कि अच्छी-भली सड़क और पुलिया को तोड़कर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि विकास कार्यों में इस प्रकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार ने सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुल और आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पंचायत और ठेकेदारों की मिलीभगत से उन्हीं पैसों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का विशेष ध्यान नहीं रखा गया। कई स्थानों पर सड़क की मोटाई कम है, जबकि पुलियों के आसपास मिट्टी धंसने लगी है। लोगों का कहना है कि बरसात शुरू होते ही सड़क की असली स्थिति सामने आ जाएगी। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ग्रामीणों को कोई स्थायी सुविधा नहीं मिल पाएगी।
यह मामला सिर्फ एक सड़क या पुलिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे पंचायत तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की तस्वीर पेश करता है। सरकारी योजनाओं का उद्देश्य ग्रामीण विकास और जनसुविधा बढ़ाना होता है, लेकिन जब योजनाएं ही कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाएं तो आम जनता का भरोसा टूटना स्वाभाविक है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सड़क निर्माण के दौरान पुलिया बनाई जा चुकी थी, तो पंचायत ने उसी स्थान पर दोबारा निर्माण की अनुमति कैसे दे दी क्या संबंधित विभागों ने तकनीकी जांच की क्या अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया यदि नहीं, तो यह सीधे-सीधे प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनियमितता का मामला माना जाएगा।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि सड़क और पुलिया निर्माण में कितनी राशि खर्च हुई तथा गुणवत्ता मानकों का पालन हुआ या नहीं। साथ ही पंचायत द्वारा दोबारा कराए जा रहे निर्माण कार्य की भी जांच होनी चाहिए।
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार के मामलों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो ग्रामीण विकास योजनाएं सिर्फ कागजों तक सीमित रह जाएंगी। भ्रष्टाचार का यह खेल लगातार सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा रहा है और इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
विकास के नाम पर सरकारी धन की जिस तरह “होली” ग्राम पंचायत शाहा में खेली जा रही है, उसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है, या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
