
योजनाओं में करोड़ों का घोटाला उजागर
प्रशिक्षण, भ्रमण और अनुदान योजनाएं बनीं भ्रष्टाचार का जरिया जाँच एजंसी पर बड़ा सवाल पक्ष पात करने के गंभीर आरोप
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला। आदिवासी बाहुल्य मंडला जिले में किसानों के उत्थान के लिए संचालित सरकारी योजनाएं अब गंभीर सवालों के घेरे में हैं। कृषि विभाग में “कागजी खेती” का बड़ा खेल सामने आया है, जिसमें प्रशिक्षण, भ्रमण, अनुदान और कृषि यंत्र वितरण जैसी योजनाओं में व्यापक अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। यह मामला न केवल किसानों के हक पर सीधा प्रहार है, बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का भी बड़ा संकेत देता है।
सूत्रों और प्रभावित किसानों के अनुसार, विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी मिलकर योजनाओं को कागजों में संचालित दिखाकर सरकारी राशि का दुरुपयोग कर रहे हैं। किसानों का आरोप है कि जिन योजनाओं का लाभ उन्हें मिलना चाहिए, वे या तो कागजों तक सीमित हैं या फिर चुनिंदा लोगों तक ही पहुंच रही हैं।
योजनाओं में गड़बड़ी का पूरा तंत्र
किसान प्रशिक्षण योजना:
रिकॉर्ड में सैकड़ों किसानों को प्रशिक्षित दिखाकर बजट खर्च किया जा रहा है, जबकि जमीनी स्तर पर प्रशिक्षण या तो होता ही नहीं या औपचारिकता भर रह जाता है।
कृषक भ्रमण योजना:
फर्जी नाम जोड़कर भ्रमण दर्शाया जाता है, जबकि अधिकांश किसानों को इसकी जानकारी तक नहीं होती।
अनुदान और कृषि यंत्र वितरण:
पात्र किसानों को दरकिनार कर कथित तौर पर अपात्र और “सेटिंग” वाले लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है। दुकानदारों और विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत के भी आरोप हैं।
बीज-खाद गुणवत्ता में लापरवाही:
किसानों को निम्न गुणवत्ता की सामग्री मिलने से उत्पादन प्रभावित हो रहा है, लेकिन जांच व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।
अग्रिम राशि और फर्जी समायोजन:
विभागीय मदों से अग्रिम राशि निकालकर बाद में फर्जी बिल-वाउचर के जरिए समायोजन कर सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
“सेटिंग सिस्टम” का आरोप, किसानों की आवाज दबाने का दावा
कई किसानों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विभाग में बिना लेन-देन के कोई काम नहीं होता। शिकायत करने पर या तो कार्रवाई नहीं होती या शिकायतकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। इससे किसानों में भारी असंतोष व्याप्त है।
जनप्रतिनिधि ने खोला मोर्चा
जनपद पंचायत मंडला क्षेत्र क्रमांक 14 के सदस्य हरेन्द्र कुमार मसराम ने इस पूरे मामले को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उन्होंने कृषि विभाग के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए तत्काल स्थानांतरण और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

अशवनी झारिया, प्रभारी उपसंचालक कृषि मण्डला
ज्ञापन में प्रभारी उपसंचालक अश्विनी झारिया, सहायक संचालक अरविंद कुमार वर्मा और अनुविभागीय कृषि अधिकारी मधु अली की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए हैं। मसराम का कहना है कि इन अधिकारियों के कार्यकाल में लगातार अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे विभाग की छवि धूमिल हुई है और किसानों को योजनाओं का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है।
7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन
जनपद सदस्य ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं की गई तो वे अपने समर्थकों के साथ जिला मुख्यालय में अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन करेंगे। ज्ञापन की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री और संबंधित विभागीय अधिकारियों को भी भेजी गई है।
प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती
मंडला में कृषि योजनाओं से जुड़ा यह मामला प्रशासन के लिए एक परीक्षा की घड़ी बन गया है। एक ओर किसानों का भरोसा टूट रहा है, वहीं दूसरी ओर सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
