PWD मंडला में नियम नहीं, रिश्ते चलते हैं?-दोषी उपयंत्री पर कार्रवाई से बचता विभाग—किसके इशारे पर दोबारा जांच का खेल?

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला
मंडला का लोक निर्माण विभाग अब सवालों से नहीं, सीधे संदेहों से घिर चुका है। जिस उपयंत्री—विशाल उईके—पर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप जांच में उजागर हो चुके हैं, वही अधिकारी आज भी न सिर्फ कुर्सी पर कायम है, बल्कि अतिरिक्त प्रभार के साथ “सिस्टम” पर हावी दिखाई दे रहा है।


यह अब महज लापरवाही नहीं—संरक्षण का संकेत है।
जांच को चुनौती… या सिस्टम को?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि—
उपयंत्री ने अपने से वरिष्ठ अधिकारियों की जांच पर सवाल उठाए
कार्यपालन यंत्री, एसडीएम और जिला कोषालय अधिकारी जैसे जिम्मेदार पदों की रिपोर्ट को दरकिनार किया
और फिर पुनः जांच की मांग कर दी
सवाल सीधा है—
क्या अब विभाग में हर दोषी अधिकारी अपनी मर्जी से जांच को चुनौती देकर नई जांच बैठवा सकता है?
अगर हां, तो फिर किसी भी जांच का क्या मतलब रह जाता है?
बार-बार जांच = “समय खरीदने की रणनीति”?
जिले में चर्चा है कि—
पहली जांच में दोष सामने आए
कार्रवाई की जगह “पुनः जांच” का रास्ता चुना गया
और इस दौरान अधिकारी को हटाने की बजाय और मजबूत किया गया
यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि कहीं न कहीं
“कार्रवाई टालो, समय निकालो, मामला ठंडा करो”
की रणनीति पर काम हो रहा है।
नियमों की खुली अनदेखी
एक ही अधिकारी को—
कई क्षेत्रों का प्रभार
एसडीओ जैसी जिम्मेदारियां
देना न केवल प्रशासनिक मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि यह साफ संकेत है कि—
“कुछ चेहरे सिस्टम के लिए जरूरी हैं, चाहे आरोप कितने भी गंभीर क्यों न हों।”
जिला प्रशासन की चुप्पी = मौन समर्थन?
अब नजरें जिला प्रशासन पर हैं—
क्या कलेक्टर स्तर पर इस मामले की समीक्षा होगी?
क्या पहली जांच रिपोर्ट को आधार मानकर कार्रवाई होगी?
या फिर फाइलों में ही न्याय दबा रहेगा?
चुप्पी जितनी लंबी होगी,
संदेह उतना गहरा होता जाएगा।
जनता का गुस्सा—अब खुलकर सामने
मंडला की जनता अब पूछ रही है—
“अगर दोषी साबित होने के बाद भी अधिकारी बचता है,
तो क्या भ्रष्टाचार ही अब योग्यता बन गया है?”
अब दो ही रास्ते
प्रशासन के सामने स्थिति साफ है—
या तो:
दोषी अधिकारी को तत्काल हटाया जाए
निलंबन, FIR और रिकवरी की कार्रवाई हो
और सिस्टम में भरोसा बहाल किया जाए
या फिर:
यह स्वीकार कर लिया जाए कि
मंडला PWD में ईमानदारी की नहीं, ‘जुगाड़’ की कद्र है
रेवांचल टाइम्स का स्पष्ट रुख
यह मामला अब यहीं रुकने वाला नहीं है।
यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो—
पूरे प्रकरण को उच्च स्तर तक ले जाया जाएगा
संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग उठेगी
और हर दस्तावेज जनता के सामने रखा जाएगा

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