पानी नहीं… भ्रष्टाचार बह रहा है -देवहारा की टंकी टपकी, अब जिम्मेदारों की चुप्पी पर उठे सवाल

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला (घुघरी)।
मंडला जिले में “हर घर नल, हर घर जल” योजना अब मज़ाक बन चुकी है। आदिवासी बहुल्य क्षेत्र में लोगों को शुद्ध पानी देने का दावा करने वाली यह योजना अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। ताजा मामला ग्राम पंचायत देवहारा का है, जहां जल जीवन मिशन के तहत बनी ओवरहेड पानी की टंकी चालू होने से पहले ही टपकने लगी—और इसके साथ ही विभाग की पोल भी खुल गई।


टंकी नहीं, भ्रष्टाचार का टैंक!
ग्रामीणों का कहना है कि टंकी में पानी भरते ही वह जगह-जगह से रिसने लगी। सवाल यह है कि जब टंकी अभी से पानी नहीं संभाल पा रही, तो आने वाले समय में यह किस “विकास” का उदाहरण बनेगी? साफ है कि निर्माण में घटिया सामग्री और लापरवाही का खेल हुआ है।


जल निगम के जीएम और ठेकेदार पर सीधे सवाल
इस पूरे मामले में जल निगम विभाग के जिम्मेदार अधिकारी, खासकर जीएम की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या बिना गुणवत्ता जांच के भुगतान कर दिया गया?
क्या ठेकेदार को खुली छूट दे दी गई?
या फिर सब कुछ “मिलीभगत” का खेल है?
जब टंकी शुरू होते ही जवाब दे रही है, तो यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं, बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार की बू देता है।


मंत्री के जिले में ही योजनाओं का बंटाधार
सबसे बड़ा सवाल यह है कि प्रदेश की पीएचई मंत्री सम्पतिया उईके के अपने ही जिले मंडला में जल जीवन मिशन की यह हालत क्यों है?
जहां मंत्री खुद इस विभाग की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, वहीं उनके गृह जिले में जनता को पानी के बजाय रिसाव और खतरा मिल रहा है।
6 साल से सूखी पाइपलाइन, लेकिन बिल जारी
देवहारा ही नहीं, सिंघानपुरी और बम्हनी पंचायतों में भी हालात बदतर हैं—
6 वर्षों से योजना अधूरी
पाइपलाइन उखड़ी, नल खराब
एक बूंद पानी सप्लाई नहीं
इसके बावजूद पंचायतों पर हजारों रुपये के बिजली बिल थोप दिए गए हैं।

यानी पानी नहीं, लेकिन बिल जरूर!
शिकायतों पर भी मौन प्रशासन
जनसुनवाई और 181 पर शिकायतों के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे साफ है कि या तो शिकायतें दबाई जा रही हैं या फिर जिम्मेदार जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं।


ग्रामीणों का अल्टीमेटम
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही टंकी का ध्वस्तीकरण कर नई टंकी नहीं बनाई गई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो मामला जिला मुख्यालय से लेकर राजधानी तक उठाया जाएगा।


सीधा सवाल प्रशासन से
जब योजनाओं में पानी के बजाय भ्रष्टाचार बह रहा हो,
तो आखिर “हर घर जल” कैसे पहुंचेगा?
क्या जल निगम के अधिकारी, ठेकेदार और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इस रिसते सिस्टम की जिम्मेदारी लेंगे,
या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?

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