घुघरी में नशे का साम्राज्यपुलिस कुंभकर्णी नींद में, युवा पीढ़ी बर्बादी की राह पर

Revanchal
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दैनिक रेवांचल टाइम्स, मंडला/घुघरी।
तहसील मुख्यालय घुघरी इन दिनों किसी विकास मॉडल के लिए नहीं, बल्कि अवैध नशे के “हब” के रूप में अपनी पहचान बना रहा है। रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं भले ही यहां संघर्ष कर रही हों, लेकिन अवैध शराब, गांजा और अन्य मादक पदार्थों का कारोबार यहां खुलेआम फल-फूल रहा है।


घुघरी थाना क्षेत्र के गांव-गांव में कच्ची और पक्की शराब की गंध अब आम हो चुकी है। हालात इतने भयावह हैं कि मानो इस क्षेत्र ने “नशा मुक्त भारत” के संकल्प को ठुकराकर खुद को “नशा युक्त क्षेत्र” घोषित कर दिया हो।
सरकार एक तरफ चौपाल लगाकर नशे के खिलाफ जागरूकता का ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार विभाग और पुलिस प्रशासन गहरी नींद में डूबे नजर आ रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि ये चौपाल उनके लिए जागरूकता नहीं, बल्कि “लोरी” बन चुकी हैं।


सबसे बड़ा सवाल पुलिस के मुखबिर तंत्र पर खड़ा होता है। क्या यह तंत्र पूरी तरह फेल हो चुका है, या फिर जानबूझकर आंखें मूंद ली गई हैं? क्योंकि जिस स्तर पर यह कारोबार चल रहा है, उसमें अनभिज्ञता की दलील देना खुद में संदेह पैदा करता है।


क्या सब कुछ जानते हुए भी चुप है सिस्टम?
आज स्थिति यह है कि नशे का कारोबार किसी छिपे हुए अपराध की तरह नहीं, बल्कि खुले “व्यवसाय” की तरह संचालित हो रहा है। ऐसे में यह सवाल लाजमी है—क्या पुलिस वास्तव में अनजान है, या फिर “सब चलता है” की नीति के तहत मौन सहमति दी जा रही है?


युवा पीढ़ी बन रही शिकार, इस अवैध नशे का सबसे बड़ा दुष्प्रभाव घुघरी की युवा पीढ़ी पर पड़ रहा है।


नशे की लत बढ़ रही है
सड़क हादसों में इजाफा हो रहा है
परिवार टूट रहे हैं, अपराध का ग्राफ ऊपर जा रहा है, यानी एक पूरा समाज धीरे-धीरे अंधकार की ओर धकेला जा रहा है।


प्रशासन कब जागेगा?
अब देखना यह है कि क्या इस गंभीर मुद्दे पर प्रशासन संज्ञान लेता है या फिर “कुंभकर्णी सिस्टम” इसी तरह सोता रहेगा।
दैनिक रेवांचल टाइम्स इस मुद्दे को यहीं नहीं छोड़ेगा—
घुघरी में चल रहे नशे के इस काले कारोबार का सच परत-दर-परत उजागर किया जाएगा।

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