नल-जल योजना का ‘दम’ निकला, शिवनगर में नल सूखे, सिर्फ आश्वासन बह रहे

Revanchal
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बटकाखापा की शिवनगर कॉलोनी में 3 महीनों से जल संकट पंचायत की चुप्पी से ग्रामीणों में भारी आक्रोश

रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
जितेन्द्र अलबेला

सरकार का दावा है ‘हर घर जल’, लेकिन छिंदवाड़ा जिले के ग्राम बटकाखापा की शिवनगर कॉलोनी में यह दावा पूरी तरह खोखला साबित हो रहा है। यहाँ पिछले 2 से 3 महीनों से नलों में पानी नहीं, बल्कि सिर्फ जिम्मेदार अधिकारियों के खोखले वादे बह रहे हैं। भीषण गर्मी के दस्तक देते ही पेयजल संकट गहरा गया है, जिससे पूरी कॉलोनी में त्राहि-त्राहि मची हुई है।

​कागजों पर मिशन ‘सफल’, हकीकत में मटके ‘खाली’
​हैरानी की बात यह है कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन नलों की टोटी से पानी का दीदार करना ग्रामीणों के लिए सपना बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि पाइपलाइन बिछने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि पानी की समस्या दूर होगी, लेकिन योजना अब सफेद हाथी साबित हो रही है।

​प्रशासन की ‘कुंभकर्णी’ नींद
​कॉलोनीवासियों ने बताया कि इस समस्या को लेकर कई बार पंचायत प्रशासन और संबंधित विभाग को अवगत कराया गया है, लेकिन मजाल है कि किसी के कान पर जूं तक रेंगी हो। प्रशासन की इस निष्क्रियता का खामियाजा महिलाओं और बुजुर्गों को भुगतना पड़ रहा है, जिन्हें चिलचिलाती धूप में दूर-दराज के जल स्रोतों से पानी ढोना पड़ रहा है।

आक्रोशित ग्रामीण, का कहना है कि,​हम कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन पंचायत सिर्फ कल-परसों का आश्वासन देती है। क्या प्रशासन हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहा है? अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो हम चक्काजाम करने को मजबूर होंगे।

​आंदोलन की चेतावनी
​ग्रामीणों ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। उनकी दो टूक चेतावनी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर जलापूर्ति सुचारू नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन और प्रदर्शन का रास्ता अपनाएंगे।

​मुख्य सवाल जो जवाब मांगते हैं?
​जब पाइपलाइन बिछ चुकी है, तो पानी सप्लाई में क्या तकनीकी पेंच है?
​शिकायतों के बाद भी पंचायत सचिव और जिम्मेदार अधिकारी मौके पर क्यों नहीं पहुंचे?
​क्या जल जीवन मिशन के बजट का सदुपयोग केवल कागजी खानापूर्ति तक सीमित है?

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