मानवता की मिसाल पिता का साया छिनने पर ‘नटनी माई समिति’ ने थामा हाथ, तीन बेटियों के घर गूँजेगी शहनाई

Revanchal
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रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ा
जितेन्द्र अलबेला

जब हौसले बुलंद हों और साथ में समाज का सहयोग हो, तो गरीबी की दीवारें भी छोटी पड़ जाती हैं। अमरवाड़ा की नटनी माई क्षेत्रीय सेवा समिति ने एक बार फिर मानवता का परिचय देते हुए हिवरासानी, लखनवाड़ा और बारहहीरा की तीन पितृहीन (बेसहारा) बेटियों के विवाह का जिम्मा उठाकर उनके चेहरों पर मुस्कान बिखेरी है। रविवार का दिन इन परिवारों के लिए खुशियों की नई सौगात लेकर आया।


​मजदूरी कर पढ़ाया, अब शादी की चिंता हुई दूर
​हिवरासानी निवासी शीला धुर्वे की व्यथा सुनकर उपस्थित जन भावुक हो उठे। उन्होंने बताया कि 23 वर्ष पूर्व पति के निधन के बाद उन्होंने मजदूरी कर बेटी प्रियंका को एम .ए . तक शिक्षा दिलाई। शादी तय होते ही दहेज और उपहारों की चिंता सताने लगी थी, लेकिन समिति ने आगे बढ़कर हाथ थामा। इसी प्रकार लखनवाड़ा की सर्किला यादव और बारहहीरा की जानकी यादव ने भी समिति से मदद की गुहार लगाई थी।

​पैर पूजन कर भेंट की 30-30 हजार की सामग्री
​समिति ने बेटियों को सम्मान देते हुए ‘पैर पूजन’ का कार्यक्रम आयोजित किया। आगामी 5 और 12 मई को होने वाले विवाहों से पूर्व प्रत्येक बेटी को 30-30 हजार रुपये मूल्य की गृहस्थी सामग्री प्रदान की गई, जिसमें शामिल हैं,​बड़ी गोदरेज अलमारी एवं पंखा,​ट्रॉली बैग व स्टील बर्तन स्टैंड,
​स्टील टंकी, गुंडी व 5 लीटर प्रेशर कुकर,
​थाली, लोटा, गिलास व जर्मन डिब्बा सेट
​2 साड़ियां, बिस्तर सेट एवं ₹2100 नगद l

​भावुक माताएं ने कहा कि
जब अपनों ने साथ छोड़ दिया, तब समिति ने एक पिता और भाई का फर्ज निभाया। इन दुआओं का कोई मोल नहीं है।

दानदाताओं का मिला सहयोग
​समिति की इस पुनीत पहल से प्रभावित होकर छिंदवाड़ा निवासी राजेन्द्र भल्ला ने सेवा कोष में ₹55,000 की राशि दान की है, ताकि भविष्य में भी बेसहारा बेटियों की शिक्षा और विवाह में मदद की जा सके।

​इस अवसर पर संरक्षक बालकिशन साहू, अध्यक्ष अरुण ‘बूटी’ नेमा, संस्थापक राधेश्याम सोनी, कोषाध्यक्ष गणेश साहू, सुमेर चंद साहू, धनराज सिंह चंदेल, सुदामा सिंगारे, पार्षद गोविंद सराठे, नीलेश साहू, अनिता चंदेल, आशा मर्सकोले, सुमन नेमा और मंजूलता सोनी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
​नटनी माई क्षेत्रीय सेवा समिति अमरवाड़ा निरंतर दीन-हीनों की सेवा कर क्षेत्र में ‘मददगार’ के रूप में अपनी पहचान सशक्त कर रही है।

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