लगातार समीक्षा, फील्ड विजिट और योजनाओं पर कसावट—जनता की नजर अब परिणामों पर
दैनिक रेवांचल टाईम्स – मंडला।मध्य प्रदेश के मंडला जिले में नए कलेक्टर राहुल नामदेव धोते के पदभार संभालते ही प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। लंबे समय से सुस्त और लापरवाही के आरोपों से घिरे सरकारी तंत्र में अब अचानक कसावट दिखाई देने लगी है। कलेक्टर द्वारा अपनाई जा रही कार्यशैली ने जहां अधिकारियों-कर्मचारियों में सक्रियता बढ़ाई है, वहीं आम जनता के बीच उम्मीदों की नई किरण भी जगी है।
लेकिन सवाल अभी भी बरकरार है—क्या यह बदलाव जमीन पर स्थायी असर दिखा पाएगा?
नए कलेक्टर ने आते ही जिले के लगभग सभी विभागों की कमान कसने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं। लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित कर विभागीय योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया जा रहा है। खास बात यह है कि सिर्फ कागजी रिपोर्टों पर भरोसा करने के बजाय कलेक्टर खुद फील्ड में पहुंचकर योजनाओं का भौतिक सत्यापन कर रहे हैं।
इससे न केवल वास्तविक स्थिति सामने आ रही है, बल्कि अधिकारियों पर जवाबदेही भी तय हो रही है।
फील्ड में सक्रियता, योजनाओं पर फोकस
स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, शिक्षा और स्वच्छता जैसे बुनियादी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कलेक्टर द्वारा इन सभी सेक्टरों में सुधार के लिए निर्देश दिए गए हैं और उनकी मॉनिटरिंग भी लगातार की जा रही है। गांव-गांव जाकर योजनाओं की स्थिति देखना और मौके पर ही अधिकारियों को दिशा-निर्देश देना उनकी कार्यशैली की खास पहचान बनती जा रही है।
जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन पर जोर जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए जनसुनवाई को प्रभावी बनाया जा रहा है। वहीं सीएम हेल्पलाइन के मामलों को भी प्राथमिकता से निपटाने के निर्देश दिए गए हैं। पहले जहां शिकायतें महीनों तक लंबित रहती थीं, वहीं अब उनके निपटारे में तेजी आने लगी है। इससे आम लोगों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है।
पहले की लापरवाही पर लगाम?
जिले में लंबे समय से सरकारी तंत्र की सुस्ती और लापरवाही चर्चा का विषय रही है। कई विभागों में कामकाज ठप जैसी स्थिति बन गई थी। लेकिन नए कलेक्टर के आने के बाद फिलहाल स्थिति में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। अधिकारियों की जवाबदेही तय होने लगी है और कार्यों में तेजी भी दिखाई दे रही है।
चुनौतियां अभी बाकी हालांकि प्रशासनिक सक्रियता के बावजूद जमीनी स्तर पर कई चुनौतियां अब भी मौजूद हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति, रोजगार के अवसरों की कमी, सड़कों की बदहाल हालत और स्वच्छता जैसे मुद्दे अभी भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं। ऐसे में कलेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना है। साथ नैनपुर के खरीदी केन्द्र औचक निरक्षण किया और कमियां पर अधिकारियों को फटकार लगाई।
जनता की उम्मीदें और सवाल
नागरिकों का कहना है कि शुरुआत तो सकारात्मक है, लेकिन असली परीक्षा परिणामों से होगी। लोगों को उम्मीद है कि यह सक्रियता सिर्फ शुरुआती दिखावा न होकर लंबे समय तक जारी रहेगी। साथ ही यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या प्रशासनिक सख्ती नीचे तक असर दिखा पाएगी, या फिर कुछ समय बाद सब पहले जैसा हो जाएगा?
