मोहगांव विकासखंड पर मेहरबान जिले के भ्रष्टाचारी प्रभारी उप संचालक कृषि अशवनी झारिया !एनएफएसएम योजना में एक करोड़ 35 लाख का भ्रष्टाचार आया सामने ।

Revanchal
8
4 Min Read

मोहंगाव विकासखंड के लक्ष्य विभाजन पर उठे गंभीर सवाल

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – मण्डला।जिले के कृषि विभाग में रबी वर्ष 2025-26 अंतर्गत राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) दलहन योजना में बड़े स्तर पर अनियमितता और घोटाले के आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले में प्रभारी उप संचालक कृषि अशवनी झारिया एवं मोहगांव के प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी आर.के. मंडाले की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।


जानकारी के अनुसार जिले को चना प्रदर्शन के लिए 3700 हेक्टेयर तथा मसूर प्रदर्शन के लिए 2250 हेक्टेयर का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। नियमानुसार इस लक्ष्य का विभाजन जिले के सभी विकासखंडों में संतुलित एवं आवश्यकता आधारित तरीके से किया जाना चाहिए था, लेकिन आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर मोहगांव विकासखंड को असामान्य रूप से अधिक लक्ष्य आवंटित कर दिया गया।


बताया जा रहा है कि चना के कुल 3700 हेक्टेयर में से लगभग 1000 हेक्टेयर तथा मसूर के 2250 हेक्टेयर में से करीब 600 हेक्टेयर का लक्ष्य अकेले मोहगांव विकासखंड को दिया गया, जबकि जिले के अन्य 8 विकासखंडों को मात्र 200 से 300 हेक्टेयर तक सीमित रखा गया। क्षेत्रफल की दृष्टि से अपेक्षाकृत छोटा विकासखंड होने के बावजूद मोहगांव को इतना बड़ा हिस्सा दिया जाना कई सवाल खड़े करता है।


आरोप है कि प्रभारी उप संचालक कृषि अशवनी झारिया ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए मोहगांव के प्रभारी अधिकारी आर.के. मंडाले को नियम विरुद्ध लाभ पहुंचाया। इससे पूरे मामले में पक्षपात, मिलीभगत और आर्थिक अनियमितता की आशंका और गहरा गई है।


गौरतलब है कि योजना अंतर्गत प्रत्येक प्रदर्शन पर किसानों को लगभग 9 हजार रुपये की अनुदान सहायता प्रदान की जाती है, जिसके तहत उन्हें निशुल्क बीज एवं अन्य कृषि आदान सामग्री उपलब्ध कराई जानी थी। आरोप है कि इसके लिए एमपी एग्रो मण्डला के माध्यम से निजी कंपनियों को अग्रिम आदेश जारी किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों तक न तो बीज पहुंचा और न ही अन्य सामग्री उपलब्ध कराई गई। इसके बावजूद फर्जी बिल लगाकर भुगतान किए जाने की बात सामने आ रही है।


सूत्रों के अनुसार इस पूरे मामले में करीब 1 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की आशंका जताई जा रही है। किसानों एवं स्थानीय नागरिकों में इसको लेकर भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि लक्ष्य का निष्पक्ष वितरण किया जाता तो जिले के सभी विकासखंडों के किसानों को योजना का समान लाभ मिल सकता था, लेकिन कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत ने सरकारी योजना की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।


अब किसानों और जनप्रतिनिधियों द्वारा इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है। साथ ही प्रभारी उप संचालक कृषि अशवनी झारिया और आर.के. मंडाले की संपत्तियों की जांच कर यह स्पष्ट करने की मांग की जा रही है कि कहीं इस कथित घोटाले से निजी लाभ तो अर्जित नहीं किया गया।


यदि समय रहते इस मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो यह न केवल किसानों के हितों के साथ अन्याय होगा, बल्कि सरकारी योजनाओं की विश्वसनीयता पर भी गंभीर आघात पहुंचाएगा।

Share This Article
Translate »