ग्राम पंचायत सिंगारसत्ती में कमीशन खोरी का जीता जागता उदाहरण, बिना आधार तैयार किए बना दी सीसी सड़क

Revanchal
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दो हफ्ते में पड़ने लगी दरारें

आठ इंच की जगह तीन इंच की कंक्रीट ढलाई ,पुरानी जर्जर सड़क के ऊपर बिछा दिया कांक्रीट

दैनिक रेवांचल टाइम्स बजाग – ग्राम पंचायत सिंगारसत्ती के नीचे टोला में लाखों रुपये की लागत से हाल ही में निर्मित सीसी सड़क निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क का निर्माण निर्धारित मापदंडों और तकनीकी मानकों की अनदेखी करते हुए किया गया, जिसके कारण निर्माण के महज दो सप्ताह बाद ही सड़क में दरारें दिखाई देने लगी हैं।


ग्रामीणों के अनुसार किसी भी सीसी सड़क के निर्माण से पहले मजबूत आधार (बेस) तैयार किया जाना आवश्यक होता है, साथ ही सीमेंट कंक्रीट की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पॉलीथीन बिछाने और अन्य तकनीकी प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। आरोप है कि निर्माण के दौरान न तो उचित बेस तैयार किया गया और न ही पॉलीथीन बिछाई गई। ऐसे में बारिश का पानी नीचे पहुंचने पर सड़क के जल्द क्षतिग्रस्त होने की आशंका बढ़ गई है।


सोनू के घर से रामरतन के घर तक लगभग सौ मीटर से अधिक लंबाई में बनाई गई सड़क पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीण संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सड़क की ढलाई के बाद उचित तराई नहीं की जा रही है। भीषण गर्मी के बीच सड़क पर दिन में केवल एक बार पानी डाला जा रहा है, जबकि जानकारी के अनुसार कंक्रीट को मजबूती देने के लिए नियमित रूप से दो से तीन बार पानी देना या गीले बोरे से ढंककर नमी बनाए रखना आवश्यक होता है।


ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि स्वीकृत प्राक्कलन में सड़क की मोटाई लगभग आठ इंच निर्धारित थी, लेकिन मौके पर केवल तीन से चार इंच मोटाई की सड़क बनाई गई है। इसके अलावा ढलाई के दौरान वाइब्रेटर मशीन का उपयोग नहीं किए जाने से कंक्रीट का मिश्रण सही तरीके से सघन नहीं हो पाया, जिससे सड़क की मजबूती प्रभावित हुई है।


स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब पंद्रह वर्ष पुरानी जर्जर सीसी सड़क को पूरी तरह हटाने के बजाय उसी के ऊपर नई ढलाई कर दी गई, जिससे निर्माण लागत में बचत कर गुणवत्ता से समझौता किया गया। ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव तथा निर्माण कार्य की निगरानी से जुड़े जिम्मेदार अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि उपयंत्री द्वारा निर्माण के दौरान नियमित निरीक्षण और तकनीकी निगरानी की जाती तो मापदंडों के विपरीत कार्य नहीं हो पाता।


ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण में निम्न गुणवत्ता की रेत और सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसके कारण सड़क की मजबूती पर प्रश्नचिह्न लग गया है। उनका कहना है कि सड़क की वर्तमान स्थिति भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का जीता जगता उदाहरण है

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद पंचायत के अधिकारियों से सड़क निर्माण की तकनीकी जांच कराने, गुणवत्ता परीक्षण करवाने तथा निर्माण में यदि अनियमितता पाई जाए तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी राशि से होने वाले निर्माण कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित होना जरूरी है, ताकि जनता को लंबे समय तक उसका लाभ मिल सके।

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