रेवांचल टाइम्स छिंदवाड़ाजितेन्द्र अलबेला बरारीपुरा स्थित प्राचीन एवं स्वयंभू श्री बगलामुखी माता मंदिर के नवनिर्माण का संकल्प अब साकार होने जा रहा है। विगत दिनों मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भव्य भूमिपूजन कार्यक्रम संपन्न हुआ।
पिपरिया के पंडित जितेंद्र शास्त्री के सान्निध्य में संपन्न हुए इस अनुष्ठान में शहर के गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए।अयोध्या के ‘बंसी पहाड़पुर’ पत्थरों से होगा निर्माणमंदिर समिति के अध्यक्ष विजय पांडे ने बताया कि मंदिर का जीर्णोद्धार राजस्थान के बंसी पहाड़पुर के गुलाबी पत्थरों (पिंक सैंड स्टोन) से किया जा रहा।
खास बात यह है कि इसी पत्थर का उपयोग अयोध्या में प्रभु श्री रामलला के मंदिर निर्माण में भी हुआ है। लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस भव्य मंदिर की आयु 1,000 वर्ष से अधिक होगी।इतिहास दस्तावेजों में 1593 से दर्ज है ‘हिंदू देवी स्थान’मंदिर की प्राचीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि समिति के पास सन 1593 (करीब 600 वर्ष पूर्व) के ऐतिहासिक दस्तावेज मौजूद हैं
, जिनमें इस स्थान को ‘हिंदू देवी स्थान’ अंकित किया गया है। यहाँ माता बगलामुखी के साथ सरस्वती और महालक्ष्मी जी की भी पत्थर रूपी स्वयंभू प्रतिमाएं विराजमान हैं।भक्ति की मिसाल मजदूरी कर पाई-पाई जोड़ी और मंदिर को दान कर दी संपत्तिइस भूमिपूजन के अवसर पर स्वर्गीय देवकी बाई ठाकरे के अप्रतिम त्याग को याद कर हर आंख नम हो गई।
माता की अनन्य भक्त देवकी बाई ने जीवन भर मजदूरी कर अपना जीवन यापन किया।अंतिम इच्छा: अपनी मृत्यु से महज एक सप्ताह पहले उन्होंने अपना लगभग 600 वर्गफुट का मकान मंदिर समिति को दान कर दिया।परिवार का सहयोग उनके बेटे की अल्पायु में मृत्यु हो गई थी, लेकिन उनकी दोनों बेटियों ने माँ की इस वसीयत में पूर्ण सहमति देकर भक्ति की नई मिसाल पेश की।प्रमुख हस्तियों की रही गरिमामयी उपस्थितिभूमिपूजन कार्यक्रम में यजमान के रूप में आयुषी-शिखर पांडे, लक्ष्मी-संजय दास सहित अन्य परिवारों ने पूजा अर्चना की।
कार्यक्रम में मुख्य रूप से भाजपा जिलाध्यक्ष शेषराव यादव, पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना, विजय पांडे, अजय सक्सेना, हंसा अंबर दाढ़े सहित शहर के अनेक सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
