आदिवासीयों के लिए बजट प्रावधानों पर टिप्पणी

Union Budget 2024: In govt outreach to tribals, a new scheme for  development of 63,000 villages | India News - The Indian Express

दैनिक रेवाँचल टाईम्स – जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास के लिए सरकार ने विशेष बजट आवंटित किया है। जनजातीय क्षेत्रों के 11,277 गांवों के विकास के लिए 793 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसका सीधा लाभ पिछड़े और दुर्गम क्षेत्रों के निवासियों को मिलेगा।

7,133.17 करोड़ रुपए की स्वीकृति से कई जनजातीय कल्याण योजनाएं 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। विदित हो कि जनजातीय मामलों के विभाग की प्राइवेट जी आहार अनुदान योजना के लिए 2,350 करोड़ रुपये, एकीकृत छात्रावास योजना के लिए 1,703.15 करोड़ रुपये, सीएम राइज स्कूल योजना के लिए 1,416.91 करोड़ रुपये, आवास सहायता योजना के लिए 1,110 करोड़ रुपये और माध्यमिक शिक्षा बोर्ड को शुल्क प्रतिपूर्ति, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवारों के लिए छात्रवृत्ति और कक्षा 9 के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति के लिए 522.08 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

जनजातीय आबादी वाले गांवों के आधारभूत विकास के लिए अलग से निधि आवंटित होना सकारात्मक संकेत है।छात्रावास, स्कूल और छात्रवृत्ति जैसी योजनाएं, विशेषकर पिछड़े जनजातीय समूहों, को शिक्षा में भागीदारी बढ़ाने में सहायक होंगी। डाइट ग्रांट जैसे प्रावधान से कमजोर जनजातीय समूहों के पोषण स्तर में सुधार की दिशा में मदद मिल सकती है।

जनजातीय बहुल जिलों (जैसे मंडला, डिंडोरी, बालाघाट, झाबुआ, अलीराजपुर) में माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक स्तर पर उच्च ड्रॉपआउट दर रही है।


छात्रावास एवं फीस प्रतिपूर्ति से
दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को आवासीय सुविधा मिलेगी


आर्थिक बाधाओं में कमी आएगी।

विशेषकर जनजातीय बालिकाओं की निरंतरता बढ़ेगी। योजनाओं के लिए आबंटित बजट समय पर और पारदर्शी तरीके से नहीं दिए जाते हैं ,तो प्रभाव सीमित रह सकता है। राज कुमार सिन्हा
बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ

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